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पिछले एक पखवाड़े में कांग्रेस यूपी में नंबर बढ़ाने में सफल हो गयी है। जो लोग पहले यह कहते थे कि यूपी में कांग्रेस का कोई संगठन नहीं है। कांग्रेस अन्य पार्टियों से कमजोर दिखती है। राजनीतिक लोग यह मानते ही नहीं थे कि यूपी कांग्रेस का कोई वजूद भी है। ऐसे लोगों को कांग्रेस ने मुंह तोड़ जवाब दिया है। लखीमपुर किसान हिंसा मामले को लेकर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने जो तत्परता दिखाई वो काबिले गौर है। यह भी कहा जा सकता है कि किसान हिंसा को लेकर कांग्रेस ने न केवल प्रियंका गांधी, राहुल गांधी के अलावा पंजाब सीएम चरणजीत सिंह और छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल ने भी हिस्सेदारी ली। इतना ही नहीं दोनों मुख्यमंत्रियों ने मृतक किसानों के परिजनों को 50-50 राषि देने की घोषणा की। इससे भी लोगों में संदेश गया कि सहीं मायने में कांग्रेस ही किसानों के बारे में सोचतीे है।
3 अक्टूबर को जैसे ही लखीमपुर में 4 किसानों की मौत की खबर प्रियंका गांधी को मिली। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए उसी रात को लखनऊ आना का प्लान बनाया। लखनऊ में 4 तारीख को उन्होंने उ प्र कांग्रेस कार्यालय में क्षेत्रीय नेताओं से बात कर लखीमपुर जाने का मन बनाया लेकिन स्थानीय पुलिस पार्टी कार्यालय पहुंची ओर उनके कार्यक्रम को रोकने का प्रयास करने लगी। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने समझ लिया कि पुलिस उन्हें लखीमपुर जाने नहीं देगी। वो वहां से पैदल ही कार्यालय से निकल गयी। रास्ते में किसी कांग्रेस कार्यकर्ता की कार से वो सीतापुर तक पुलिस को चकमा दे कर पहुंच गयी। वहां सीतापुर पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोका। वहां प्रियंका गांधी ने पुलिस अफसरों को जमकर लताड़ा। इस बात को टीवी न्यूज चैनलों व समाचार पत्रों ने प्रमुखता से दिखाया। प्रियंका का वो वीडियो वायरल हुआ जिसमें वो पुलिस अफसरों को लताड़ती दिख रहीं थी। ये वात दीगर है कि पुलिस ने उन्हें अवैध तरीके से 50 घंटों से समय तक पीएसी गेस्ट हाउस में नजर बंद रखा। इसके बाद राहुल गांधी अपने साथ खास वरिष्ठ नेताओं के साथ लखनऊ पहुंचे वहां भी उन्हें सुरक्षा बल ने हवाई अड्डे से बाहर निकलने नहीं दिया। राहुल गांधी अपने साथियों समेत अनशन पर बैठ गये तब जाकर उन्हें उन्हें बाहर निकलने दिया गया। राहुल गांधी पंजाब के सीएम चन्नी, और सचिन पाइलेट, छत्तीसगढ के सीएम भूपेश बघंेल समेत सीतापुर पहुचे और प्रियंका गांधी मुलाकात की। वहां से राहुल, प्रियंका, सचिन पाइलेट और चन्नी व भूपेश समेत लखीमपुर मुतक किसानों के परिजनों से मिलने गये। यहां दिलचस्प यह है कि अखिलेश यादव बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा और आप नेता संजय सिंह को पुलिस ने उनके आवास पर ही नजर बंद कर दिया। इस मामले में राहुल प्रियंका ने बाजी मार ली और किसान हित के मामले में वो अव्वल हो गये।
कहने को तो सपा और बसपा का यूपी में रसूख है। सपा अपने दम पर सरकार बनाने के दावो कर रही है। बसपा भी चुनावी मैदान में उतरने के साथ अपनी जीत का दावा कर रही है। यूपी में यही दोनों क्षेत्रीय दल हैं जिन्होंने यूपी मंे भाजपा और कांग्रेस को तीन दशकों तक सत्ता में आने से रोक रखा था। 2017 में सपा और बसपा को मात देते हुए बीजेपी ने अपनी सरकार प्रचंड बहुमत से बनाई। अखिलेश यादव का मानना है कि आगामी चुनाव में वो 400 अधिक सीटों पर जीत कर सरकार बनाने जा रहे है। वहंीं दूसरी ओर बसपा ब्राह्मणों को जोड़ कर सरकार बनाने का सपना देख रही है।








