पूर्व सु्प्रीमकोर्ट जजों ने भी उठाये सवाल
लगभग 4 माह पहजे सुप्रीमकोर्ट के सीजेआई पद से रिटायर हुए हैं और उन्हें केन्द्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने अपनी शक्ति का हुए राज्यसभा का सदस्य मनोनीत कर दिया है। इस बात पर फिल्म इंडस्ट्री, राजनीतिक जगत और न्याय से जुड़े लोगों की तीखी प्रतिक्रियां आ रही हैं।वैसे पूर्व सीजेआई के कई फैसले काफी चर्चा में रहे हैं। रंजन गोगोई ने राम मंदिर बाबरी विध्वंस मामला, राफेल, एनआरसी और सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा मामले में फैसले दिये थे। वो सभी फैसले केन्द्र सरकार के हक में गये थे। चीफ जस्टिस आफ इंडिया रंजन गोगोई पर उनके अंडर में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने अपने यौन शोषण का आरोप लगाया था। लेकिन अपने मामले में भी स्वयं फैसला करते हुए आरोपों को नकार दिया था।
सबसे पहले बॉलिवुड निदेशक अनुभव सिन्हा ने ट्वीट कर पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई पर तंज कसते हुए कि आप जैसे लोगों की वजह से ही लोगों का न्याय पर से विश्वास उठता जा रहा है। आप लोगों की वजह से समाज में आपसी विश्वास खत्म होता जा रहा है। इससे पहले समाचार एजेंसी से बात करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा था कि यही जस्टिस गोगोई ने सीजेआई रहते रिटायरमेंट के बाद पद ग्रहण करने को संस्था पर धब्बा जैसा बताया था और आज खुद ग्रहण कर रहे हैं। हमें इस मामले में कानूनी पहलू पर जाने की जगह जनता की धारणा पर ध्यान देना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि इससे ज्यूडिशियल सिस्टम को लेकर जनता में क्या संदेश जा रहा है।
दिल्ली हाइ कोर्ट के पूर्व जज एपी शाह ने भी रंजन गोगोई के राज्यसभा जाने पर कहा कि इस खबर को जानकर मैं हैरान रह गया। मेरी राय में गोगोई को इससे इनकार कर देना चाहिये था। इस मुद्दे पर पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज कुरियन जोसेफ ने कहा कि मैंने रिटायरमेंट के बाद कोई सरकारी पोस्ट नहीं ली लेकिन रंजन गोगोई के राज्यसभा में जाने से मुझे काफी धक्का लगा है। ऐसे में लोगों का विश्वास न्याय व्यवस्था पर से उठेगा। जस्टिस मदन लोकुर ने कहा कि किसी के साथ न्याय भी होना चाहिये और समाज में दिखना चाहिये। अदालतों को निष्पक्ष
होना चाहिये बल्कि साफ तौर पर दिखना भी चाहिये। आज के समय में इस बात को नजरंदाज किया जा रहा है। रंजन गोगोई के राज्यसभा में जाने से साफ जाहिर हो रहा है सत्ता और न्यायिक व्यवस्था में गठबंधन हो चुका है।
आज से दो साल पहले 11 जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कान्फ्रेंस कर यह कहा कि भारत में न्याय व्यवस्था पर खतरा होने की बात कही थी। रंजन गोगोई भी उन जजों में एक थे। उनके साथ जज कुरियन जोसेफ, मदन लोकुर, जज जे चेलेमेश्वर आदि प्रेसवार्ता में मौजूद थे। भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि सुप्रीमकोर्ट के चार सीनियर जजों ने कोर्ट के बाहर प्रेसवार्ता कर सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाये थे।
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