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महाराष्ट्र में कौन बनेगा अगला सीएम
शिवसेना राज्यसभा सांसद संजय राउत ने चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए कहा कि उसने भाजपा और केन्द्र की मोदी सरकार के ​इशारे पर शिवसेना के लोगो और झण्डे को शिंदे गुट को अवैध रूप से अलॉट किया है। इसके खिलाफ ऊद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीमकोर्ट ने शिकायत कर रखी है।

श्री राउत ने उम्मीद जतायी है कि उन्हें न्यायालय से न्याय मिलेगा। आगामी आम चुनाव में मराठा मानुष भाजपा और गद्दारों को धूल चटाने का मन बना चुकी है। राउत ने आगे कहा कि पाकिस्तान में भी पूछा जाता है पता चल जायेगा कि शिवसेना किसकी है। वहां के लोग भी जानते हैं कि बाला साहब ठाकरे की ही शिवसेना है। इसके अलावा महाराष्ट्र मै श्सरकार पर संकट चल रहा है। शिंदे समेत 17 विधायकों के सिर पर विधायकी रद होने का संकट गहराया हुआ है। किसी भी दिन महाराष्ट्र सरकार गिर सकती है। भाजपा भी इससे वाकिफ है कि शिंदे गुट क

sanjay vs Devendra fadanvis
Shivsena Leader Sanjay raut takes ECI & BJP

भी भी अवैध घोषित हो सकते हैं इसलिये एनसीपी को भी तोड़ कर अजित पवार को अपनी सरकार में शामिल कर लिया है। अब हालात यह हैं कि अमित शाह ने भी सीएम शिंदे को पद से इस्तीफा देने का फरमान सुना दिया। किसी भी दिन शिंदे का इस्तीफा हो सकता है।
शिंदे और पवार भी अंदेशे में
लेकिन जो हालात शिंदे गुट के है वहीं हालात अजित पवार गुट का हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी बागी हुए विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत कर उनकी सदस्यता रद करने की मांग की है।
महाराष्ट्र में सरकार के वजूद पर संकट तो गहरा रहे हैं साथ ही विपक्ष के निशाने पर चुनाव आयोग और भाजपा है। पिछले साल 2022 जुलाई में महाविकास अघाड़ी सरकार को भाजपा ने शिवसेना के कुछ नेताओं को बागी होने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही सरकार को गिरा दिया। महाविकास अघाड़ी सरकार में मंत्री रहे एकनाथ शिंदे ने अपने समर्थक विधायकों के साथ लगभग 40 विधायकों शिवसेना से बगावत कर दी। इतना ही नहीं भाजपा के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार भी बना ली। भाजपा ने शिंदे को सीएम बना कर बागियों को एहसान तले दबा दिया।

A political strome in Maharashtra. State govt. is unstable due to Broken parties
A political strome in Maharashtra. State govt. is unstable due to Broken parties

शिंदे गुट की राजनीतिक वजूद खत्म!
एक साल पहले एकनाथ शिंदे ने अपने समर्थकों के साथ महाविकास अघाड़ी सरकार से समर्थन वापस लिया और शिवसेना के दो फाड़ कर दिये। शिंदे के साथ 40 विधायकों का समर्थन था। इसके अलावा लगभग एक दर्जन सांसदों को सपोर्ट भी था। ठाकरे गुट को इस तरह की उम्मीद सपने में भी नहीं थी कि दो दिन पहले जो लोग सरकार में थे अचानक भाजपा के ​इशारे पर बागी हो जायेंगे। लेकिन जो हुए सो हुआ सरकार तो गिरी साथ ही पार्टी भी टूट गयी। लेकिन एक बात उनके लिये अच्छी है कि आज उनके गुट को जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। शिंदे गुट में यह धारण बन चुकी है कि उन्होंने स्वार्थ के चलते शिवसेना से गद्दारी कर पार्टी दो ​टुकड़े किये और सत्ता में आ गये। शिंदे गुट के सामने राजनीतिक संकट आन खड़ा है। शिंदे और समर्थक नेताओं के लिये करो या मरो की स्थि्ति उत्पन्न हो गयी है। ठाकरे गुट उनको वापस लेगा नहीं भाजपा अब अपने साथ रखने को तैयार नहीं है। एक विकल्प रह गया है कि शिंदे गुट भाजपा में विलय कर ले।

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