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पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार में तीन दिन पहले एक जनसभा में यह कह कर सबको चौंका दिया कि छत्तीसगढ़ के सीएम को दुबई से एक सट्टा खिलाने वाली ऐप महादेव की तरफ से 508 करोड़ रुपये दिये गये है। कांग्रेस की ये सरकार भ्रष्टाचार की गंगा में नहा रही है। सरकार को जवाब देना चाहिये कि ये रकम कहां से और कैसे ली गयी है। मतदान के ठीक दो तीन दिन पहले पीएम मोदी सीएम बघेल को घेरने का प्रयास कर रहे है।

ये बात किसी को हजम नहीं हुई कि जब केन्द्र सरकार को पहले से इस मामले में जानकारी थी तो ईडी और आयकर विभाग को सरकार के खिलाफ ऐक्शन क्यों नहीं लिया गया। आम जनता को भी लगा कि ये सब चुनावी स्टंट है। वैसे भी प्रदेश में भाजपा चुनावी दौड़ में नहीं है। वो पहले से ही कांग्रेस को वॉक ओवर दे चुकी है। इतना रायता फैलने के बाद सूचना औद्योगिकी राजयमंत्री राजीव चंद्रशेखर का बयान आया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस ऐप्प का इस्तेमाल चंदा लेने के लिये किया है।
सीएम बघेल ने भाजपा और पीएम मोदी पर बड़ा हमला करते हुए सवाल पूछा कि वो पिछले कई माह से केन्द्र सरकार से महादेव ऐप्प को प्रतिबंधित करने को कह रहे थे लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। शायद इस ऐप्प पर मिलने वाली 28 प्रतिशत जीएसटी का लालच रहा होगा। उन्होंने आगे यह भी कहा कि ईडी सीबीआई और इनकम टैक्स की टीमें पिछले एक साल से छत्तीसगढ़ में छापेमारी कर रही है। अगर इसके बाद भी सट्टेबाजी करने वाली ऐप्प के जरिये इतनी बड़ी रकम कांग्रेस को दी गयी है तो ईडी और जांच एजेंसियों की ईमानदारी पर शक की सूई है। सवाल यह उठता है कि यदि राज्य सरकार ने इस ऐप्प पर कोई कार्रवाई नहीं की तो केन्द्र के आईटी विभाग ने कार्रवाई क्यों नहीं की। मजेदार बात यह है कि महादेव ऐप्प पर सबसे पहले भूपेश बघेल सरकार ने पिछले साल कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को जेल भी भेजा है। उस पर आई मिनिस्टर सारा दोष छत्तीसगढ़ सरकार के सिर मढ़ रहे हैं।
जब विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान सिर पर आ गया तो ईडी ने एक कोरियर को गिरफ्तार कर उसके पास से पांच करोड़ रुपये बरामद करने का दावा किया। जांच एजेंसी के अनुसार वो ये रकम प्रदेश सरकार को चुनाव में देने को दुबई से भेजा गया है। ईडी ने यह भी कहा कि गिरफ्तार कोरियर व चालक ने यह बात स्वीकार की है कि दुबई से कांग्रेस सरकार को 508 करोड़ की रकम दी गयी है। लेकिन यह वो साफ नहीं कर पाये कि वो रकम किसे और कैसे दी गयी है। इतनी बड़ी रकम किसी को दी जाये तो आईटी और बैंकिंग डिपार्टमेंट को कैसे पता नहीं चला।








