Supreme Court asked full detaisls of Electoral Bond puchase & donations
Supreme Court asked full detaisls of Electoral Bond puchase & donations

#Electoral Bond Scheme# Supreme Court# Modi Govt.# Finmin.Nirmala Sitaraman# Arun Jaitly# Ex CJI Ranjan Gogoi# Donation for Political Parties#

वित्त मंत्रालय ने 29वें चुनावी बांड की बिक्री के लिये नयी योजना लांच कर दी है। यह योजना पांच तारीख से शुरू हो कर बीस नवंबर तक लागू रहेगी। दिचचस्प य है कि 3 नवंबर देश की उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से चुनावी बाड खरीद फरोख्त की पूरी जानकारी 15 दिनों के भीतर बंद लिफाफे में मांगी है। सरकार की बेशर्मी तो देखिये सुप्रीमकोर्ट ने इस बांड की वैधता और खरीद फरोख्त में काला धन होने की शंका जतायी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला रिजर्व रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट यह सुनवायी चार याचिकाओं के मद्दे न नजर की है।
मालूम हो कि पिछले नौ सालों में चुनावी बांड की बिक्री नौ हजार करोड़ से अधिक की बतायी गयी है। इनमे 75 फीसद चंदा सत्ताधारी दल भाजपा को मिला है। यानि पांच हजार करोड़ से अधिक का चंदा भाजपा को मिला है। 25 फीसद चुनावी बांड का चंदा अन्य सभी राजनीतिक दलों को मिला है। यह आरोप लग रहा है कि मोदी सरकार ने चंदे के बदले देश के बड़े बड़े प्रोजेक्ट उन ​उद्योपतियों को दिये हैं जिन्होंने बीजेपी को मोटा चंदा दिया है। कांग्रेस ने यह आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने अडाणी ग्रुप को इसी योजना के तहत देश के बंदरगाह, रेलवे और एयरपोर्ट के अलावा अन्य प्रोजेक्ट के ठेके नियम कानून ताक पर रख दिये हैं। इसके साथ ही विपक्ष ने मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया है कि इन चुनावी बांड के जरिये पांच प्रदेशों में हो रहे चुनावों में किया जायेगा। इन चुनावी बांड को कोई व्यक्ति या संस्था खरीद फरोख्त कर सकता है किसी भी राजनीतिक दल को गुमनाम चंदे के रूप में दे सकता है। इस बांड को केवल स्टेट बैंक आफ इंडिया ही बेचता है। यह बांड कम से कम 1000 और अधिक से अधिक एक करोड़ का बेचा जाता है इसकी खरीद केवल डिजिटल की जाती है।

Supreme Court produced new problem for Modi Govt. asked ECI for full detils of Eelctoral bond,
Supreme Court produced new problem for Modi Govt. asked ECI for full detils of Eelctoral bond,

पहले भी चुनावी बांड को लेकर मचा था हल्ला
2017—18 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी बाड लाने की सलाह मेादी सरकार को दी। उसके बाद से संसद में इस बिल को पास करा लिया गया बाद में राष्ट्रपति ने इस बिल को मजूरी दे कर इसे वैध करार दे दिया। उस समय कांग्रेस ने इस बांड की बिक्री पर विरोध जताया था। इसे लेकर कांग्रेस ​सुप्रीमकोर्ट भी गयी लेकिन तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने मामले को खारिज करते हुए फैसला मोदी सरकार के फेवर में दे दिया। बाद में जब गोगोई रिटायर हुए तो कुछ माह बाद ही भाजपा ने रंजन गोगोई को राज्यसभा भेज कर इस बात का इनाम दिया था। यह गुमनाम चंदा केवल वही राजनीतिक दल को ही दिया जाता है जिसने पिछले आम चुनाव या विधानसभा चुनाव में एक प्रतिशत वोट हासिल किया हो। 2017 में केन्द्र सरकार इस बांड को ये कह कर लायी थी कि इससे चुनावी फंड में पारदर्शिता आयेगी।
लेकिन हाल ही में मोदी सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में यह कहा कि आम नागरिक को यह जानने का हक नहीं है कि राजनीतिक दल को कहां से और किसने चंदा दिया है। इस पर लोगों ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ये जनता के जानने का अधिकार की अवहेलना है। सरकार की जानकारी में है कि यह बांड किसने खरीदा और किसको भुगतान किया गया है। यह सब नानकारी एसबीआई के पास होती है। क्यों कि चुनावी बांड केवल एसबीआई के द्वारा ही ​की जाती है।

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