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नाम बदलने से हमें भी ऐतराज नहीं है! ध्यानचंद महान थे, मगर संघियों को यह नहीं बोलना चाहिए कि राजीव गांधी कौन से खिलाड़ी थे..।
वो खिलाड़ी थे,मगर किसी गेम के नहीं! वो प्लेन उड़ाते थे,कार दौड़ाते थे! भारत को उन्होंने कम्प्यूटर दिया। सही मायने में आप इसे न्यू इंडिया बोल सकते हैं। तो राजीव गांधी खिलाड़ी नहीं थे! इसलिए संघियों ने उनके नाम पर बने मैडल का नाम बदल दिया। बाकी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जेम्स वाट के पापा थे।
इसलिए इनके नाम रेलवे स्टेशन है! खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिसने कभी बैट का हैंडल नहीं पकड़ा क्रिकेट के सर डॉन ब्रैडमैन हैं, जिनके नाम हजारों रिकॉर्ड हैं। जिन्हें कोई नहीं तोड़ सकता। इसलिए अहमदाबाद में बना सरदार पटेल स्टेडियम इन्होंने खुद के नाम कर लिया…ग्रहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह से अगर पूंछा जाये की मैदान में सिली प्वाइंट कहा होता है उसे यह भी नहीं पता होगा। मगर देखो आज वो बीसीसीआई का अध्यक्ष है ऐसा क्यों है कोई संघी मुझे बता दें..???
असल में इन्हें गांधी परिवार से जलन है! इसलिए उन्हें छोटा करने की वजह से खुद रोज छोटे हो रहे हैं..। और हां आप नोट करिये एक वक्त ऐसा आयेगा,की गांधी परिवार तो वहीं रहेगा, जहां इतिहास ने उसे रख्खा है मगर ये लोग धूल बन जायेंगे, फिर एक हवा के झोंके से उड़ जायेंगे फिर कभी न दिखेंगे।
आनंद यादव

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