
#By assembly elections# NDA Vs INDIA# Dara Singh Vs Sudhakar Singh# BJP Vs Sp# Akhilesh Yadav Vs Yogi# OP Rajbhar, Sanjay Nishad# Congress Support to SP#
पांच सितंबर को देश के 6 प्रदेशों की सात सीटों पर उप चुनाव हुए। आठ सितंबर को उन सभी विधानसभा चुनावों का रिजल्ट आया। तीन सीटों परप बीजेपी की उम्मीदवार जीते वहीं चार जगहों पर इंडिया गठबंधन को भारी सफलता मिली है। बीजेपी को त्रिपुरा की दो व उत्तराखंड की एक सीट पर सफलता मिली। वहीं इंडिया गठबंधन को प बंगाल, झारखंड, केरल और यूपी में जीत मिली है। समाचार लिखने तक सपा केे उम्मीदवार 33 हजार से अधिक वोटों आगे चल रहे हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अब सुधाकर सिंह ही विधायक बनने जा रहे हैं। सुधाकर सिंह सपा के टिकट पर तीसरी बार एमएलए बनेंगे। कांग्रेस ने सपा उम्मीदवार को खुलकर समर्थन दिया। इसके लिये प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अपने कार्यकर्ताओं को लिखित में सपा उम्मीदवार के समर्थन व प्रचार करने की अपील की थी
यूपी की घोसी सीट बनी प्रतिष्ठा का सवाल
यूपी की विधानसभा घोसी सीट पर उप चुनाव हुआ जिस पर भाजपा ने पूर्व मंत्री दारा सिंह चौहान पर विश्वास जताते हुए चुनाव लड़वाया है। दारा सिंह चौहान सवा साल पहले ठीक विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा और मंत्री पद से इस्तीफा दे कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। सपा के टिकट पर वो विधायक का चुनाव घोसी से लड़े और विधायक बने। लेकिन सवा साल में उनका सपा से मोहभंग हो गया और वापस भाजपा में शामिल हो गये। दारा सिंह ने घोसी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। यही वजह रही कि घोसी विधानसभा में उप चुनाव की नौबत हुई इस बात को लेकर भी घोसी के मतदाताओं रोष था। वैसे भी दारा सिंह चौहान ने कभी अपने क्षेत्र के विकास के बारे में नहीं सोचा। यही वजह रही कि युद्ध स्तर पर चुनाव की तैयारी और प्रचार करने के बाद भी दारा सिंह को हार का सामना करना पड़ा।

बीजेपी, राजभर और निषाद का धुआंधार प्रचार भी काम न आया
घोसी विधानसभा उप चुनाव में दारा सिंह चौहान को जिताने को सुभासपा के सुप्रीमो ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के संजय निषाद ने जबरदस्त प्रचार किया लेकिन जनता ने इनकी अपील को नकारते हुए सपा के उम्मीदवार सुधाकर सिंह को ही वोट और सपोर्ट किया। इससे जाहिर हो गया कि अब भाजपा के लुभावने वादों और दावों से जनता ऊब चुकी है। घोसी उप चुनाव में मिली सपा उम्मीदवार की जीत से इंडिया अलायंस को काफी बढ़त मिलेगी। अभी तक लोग यह पूछते है कि योगी और मोदी के आगे कौन टिकेगा उन लोगों को जवाब मिल गया है।

कौन हैं दिग्गज नेता दारा सिंह चौहान
यूपी की राजनीति मे दारा सिंह चौहान पिछले तीन दशकों से हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत कांग्रेस की थी। लेकिन उसके बाद वो बसपा से जुड़ गये। बसपा सुप्रीमो मायावती ने दारा सिंह पर विश्वास कर उन्हें 1996 में राज्यसभा भेज दिया। लेकिन चार साल बाद 2000 में वो बसपा छोड़ सपा में शामिल हो गये। सपा ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया। लेकिन वहां भी उनका मन नहीं लगा तो वो फिर से बसपा में आ गये। लेकिन कुछ दिनों बाद वो 2017 भाजपा में शामिल हो गये। योगी सरकार में वो मंत्री बनाये गये। लेकिन 2022 के चुनाव के ठीक पहले वो भाजपा से निकल कर सपा में आ गये और घोसी विधानसभा सीट से जीत कर विधायक बन गये। लेकिन सवा साल में उन्होंने ने सपा को छोड़ विधायकी से इस्तीफा दिया और फिर से भाजपा में शामिल हो गये। इस तरह दारा सिंह दो बार सपा, बसपा और भाजपा में अपने मतलब के लिये शामिल हो चुके हैं।
अंदर ही अंदर दारा सिंह से चिढ़ते थे नेता
उनकी इस दलबदलू फितरत से सभी दल के नेता अंदर ही अंदर चिढ़े बैठे थे। अगर दारा सिंह चुनाव जीत जाते तो भाजपा संतोष कर लेती हार के बाद दारा सिंह की हैसियत कम हो जायेगी। साथ ही ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद की औकात भी भाजपा को पता चल गयी है। अब यह मान लेना चाहिये कि इन दलबदलुओं के बारे में जनता सब जान गयी है ये सभी नेता अपना उल्लू सीधा करने के लिये वोटों का सौदा करते हैं।







