
#MP Assembly Election 2023# PM Modi & Shah# Angry BJP Leaders# CM Shivraj# Ex CM Kamalnath & Digvijay Singh# Priyanka Gandhi# Rahul Gandhi# EX CM Uma Bharti# Ex Loksabha Speaker Sumitra Mahajan# Ex MP Raghunandan Lal Sharma#
नाराज भाजपा ही खेल बिगाड़ेगी चुनाव में समीकरण
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के ऐलान कभी भी हो सकते हैं। भाजपा अपनी सत्ता कायम रखने को पुरजोर कोशिश में जुटी है। वहीं कांग्रेस भी सत्ता पाने को एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। कर्नाटक और हिमाचल मे भाजपा को पटखनी देने के बाद से कांग्रेस का मनोबल काफी हाई है। पूर्व सीएम कमलनाथ और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की जोड़ी इस चुनाव में काफी संयमित ढंग से काम करती नजर आ रही है। स्थानीय नेता व कार्यकर्ता भी काफी तालमेल से एकजुट नजर आ रहे हैं। हिमाचल और कर्नाटक में मिली भारी सफलता से भी पार्टी कार्यकर्ताओं में मनोबल काफी हाई है। दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मध्यप्रदेश में काफी सक्रिय दिख रही है इससे पार्टी को और भी मॉरल सपोर्ट मिल रहा है। इसके उलट भाजपा को अपनी ही नीतियों के खिलाफ जंग लड़नी पड़ रही है। स्थानीय नेताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। सब कुछ पीएम मोदी और अमित शाह कंट्रोल कर रहे हैं।
भाजपा को अपनों से ही हो रहा खतरा
वहीं प्रदेश मेंं तीन प्रकार की भाजपा देखने को मिल रही है। पहली है शिवराज भाजपा दूसरी है महाराज भाजपा और तीसरी है नाराज भाजपा। पहले शिवराज ज्यातिरादित्य से कहते थे माफ कीजिये महाराज आज कहते हैं आइये स्वागत है महाराज।

महाराज के साथ उन दो दर्जन विधायकों का भी बीजेपी को सिर माथे रखना पड़ रहा है। इस वजह से भाजपा के पुराने और वफादार नेता कार्यकर्ता काफ नाराज हैं जिन्होंने मुद्दतों से पार्टी की नि:स्वार्थ सेवा लेकिन पार्टी ने उनकी सेवा और निष्ठा की समझा नहीं और बाहर से आये कांग्रेसी विधायकों को सिर माथे रखा है। ये बात सामान्य नेताओं और कार्यकर्ताओं की नहीं है। इस तरह के नाराज लोगों में पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व लोकसभा स्पीकर और सांसद भी हैं जिन्होंने अपने खून पसीने से पार्टी को इस मुकाम पर पहुंचाया है। इन सभी वरिष्ठ नेताओं की पार्टी की तरफ से अनदेखी की जा रही है। इससे उनकी पीड़ा को देखा व समझा जा सकता है। केन्द्रीय भाजपा ने अपना रवैया न सुधारा तो विधानसभा चुनाव में तो गच्चा खाना पड़ सकता है साथ मोदी जी का तीसरी बार पीएम बनने का सपना भी टूट सकता है।
अनदेखी से वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी
चर्चा है कि जब से ज्योतिरादित्य सिंध्यिा ने भाजपा ज्वाइन की है तब से प्रदेश भाजपा में असंतोष दिखने लगा है। सिंधिया के साथ आये विधायकों के आगे बजेपी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की शिकायतें मिलने लगी हैं। पूर्व सीएम उमा भारती वर्तमान भाजपा के रवैये से काफी क्षुब्ध दिख रही हैं। हाल ही में भाजपा ने जनआशीर्वाद रैली का आयोजन किया लेकिन उसमें पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को इनवाइट तक नहीं किया गया। इससे उमा भारती काफ आहत हैं उनका कहना है कि कम से कम पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते ही निमंत्रित तो कर सकते थे। भले ही मैं वहां नहीं जाती। लेकिन मुझे ऐसे बर्ताव पार्टी नेताओं से उम्मीद नहीं थी। अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में भाजपा क सरकार बनवायी थी तो मैंने भी कांग्रेसी दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता को हरा कर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनायी थी। इस बात को पार्टी कैसे भुला सकती है। उमा भारती इस बात से भ नाराज हैं कि शिवराज ने उनके सगे भतीजे को सरकार में मंत्री बनाने से पहले एक बार पूछा तक नहीं। ये सिर्फ पुराने नेताओं को जलील करने के अलावा कुछ भी नहीं है। अब वो भाजपा नहीं रह गयी जब कुशाभाउ अटल बिहारी और लालकृष्ण आडवाणी वाली पार्टी नहीं रह गयी है। अब पार्टी को गुजरात लॉबी ने हाइजैक कर लिया है।
पूर्व लोकसभा स्पीकर और सांसद भी आहत
पूर्व लोकसभा स्पीकर और सांसद सुमित्रा महाजन का नाम मध्यप्रदेश के दिग्गज नेताओं में माना जाता रहा है। लेकिन आज वो पार्टी में कहीं भी नहीं दिखती हैं। श्रीमती महाजन पांच बार सांसद बनने का गौरव प्राप्त किया है। दिलवस्प बात यह है कि सुमित्रा महाजन अपने संसदीय क्षेत्र में वो ताई के नाम से जानी जाती हैं। मोदी सरकार पार्ट 1 में उन्हें लोकसभा स्पीकर का पद दिया गया था। उनके कार्यकाल तक लोकसभा में काफी शांति व न्यायपूर्ण ढंग से सत्र चलता था। आजकल तो स्पीकर और उप राष्ट्रपति संसद को दानेां सदनों में भाजपा के नेताओं की तरह काम करते दिखते हैं। पिछले दो तीन सत्रों लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति ने विपक्ष के काफी सांसदो को पूरे सत्र के लिये सस्पेंड कर दिया उनकी इस कार्यप्रणाली को देखते हुए यह कहा कि सभापति और स्पीकर अपनी निष्पक्षता कायम रखने में असफल रहे हैं।
अभी हम मरे नहीं जिंदा हैं—पूर्व सांसद रघुनंदन लाल शर्मा
आज की भाजपा से आहत पूर्व भाजपा सांसद रघुनंदन लाल शर्मा आज की भाजपा से काफी नाराज दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने पुराने और दिग्गज नेताओं को मृत प्राय समझ लिया है लेकिन हम अभी मरे नहीं नहीं जिंदा है। हमने अपने खून पसीने से पार्टी को इस मुकाम पर पहुंचाया है इस बाता को भूलना नहीं चाहिये। आज प्रदेश के स्थानीय दिग्गज नेताओं को पर्टी साइड लाइन कर रही है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव की बागडोर अब केन्द्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है। टिकट वितरण से लेकर छोटी से छोटी बात पर निर्णय अमित शाह या पीएम मोदी लेते है। लगता है कि केन्द्रीय नेतृत्व को सीएम शिवराज पर ऐतबार नहीं रह गया है। शायद मध्य प्रदेश में मोदी और शाह अपने कठपुतली नेता को सीएम बनाने की मंशा रखते हैं।







