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मोदी सरकार गोदी मीडिया से नाराज!
जिन पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं वहां से भाजपा की आगामी रणनीति तय होने वाली है। कर्नाटक हारने के बाद से भाजपा दक्षिण भारत में जीरो हो गयी है। तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भाजपा और बीआरएस के बीच गुपचुप समझौता हो गया है। अगर तेलंगाना में बीआरएस चुनाव हारती है और कांग्रेस की सरकार बनती है तो भाजपा के लिये साउथ इंडिया में रास्ते बंद हो जायेग। इसका सीधा असर आने वाले आम चुनाव पर भी पड़ने वाला है इसी लिये भाजपा ने बीआरएस के साथ जाने का फैसला लिया है। इसका ऐलान पीएम मोदी ने तेलंगाना की एक जनसभा मे करते हुए कहा कि आने वाले समय में तेलंगाना में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। लेकिन धरातल पर देखा जा रहा है कि तेलंगाना में कांग्रेस का आधार बढ़ता जा रहा है उसके पीछे कांग्रेस का एकजुट हो कर प्रचार में जुटे रहना है। खासतौर से राहुल प्रियंका और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का सक्रिय होना है।
बीआरएस और ओवैसी की भाजपा से नूराकुश्ती
दरअसल यहां बीआरएस और कांग्रेस के बीच जबरदस्त टक्कर हो रही है। यहां भाजपा का प्रभाव न के बराबर है उनसे ऊपर असुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएएमई के बाद चौथ्े नंबर पर माना जा रहा है। वैसे इस बात की चर्चा है कि भाजपा का बीआरएस और ओवैसी की पार्टी से करार हो गया है। वैसे भी यह देखा गया है कि जांच एजेंसियों ने कभी भी ओवैसी की पार्टी के नेता को निशाने पर नहीं रखा है। भाजप चाहती है कि वो बीआरएस और ओवेसी की पार्टी के साथ गुपचुप समझौता कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि कांग्रेस को हराने में वो तीनों मिलकर प्रयास करेंगे तो भाजपा को इसका लाभ आगामी आम चुनाव में मिलेगा।
कांग्रेस की सभाओं में उमड़ी भीड़
भाजपा और बीआरएस को इस बात की हैरानी हो रही है कि कांग्रेस की रैलियों और जनसभाओं में इतनी भीड़ क्यों कर हो रही है। खासतौर से राहुल गांधी और प्रियंका की जनसभाओं में जबरदस्त जनता दिख रही है। मल्लिकार्जुन खरगे की सभाओं का भी जनता में खासा प्रभाव देखा जा रहा है। बेरोजगारी झेल रहे युवा और बेहाल किसान भी मोदी व बीआरएस सरकार दोनो हैरान हैं कि आखिर क्या बात है कि कांग्रेस की रैलियों और सभाओं में जनता क्यों आ रही है। क्या इसका मतलब प्रदेश में उनकी पार्टियों का रसूूख खत्म हो रहा है। युवाओं और किसानों के बीच कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता का राज क्या है। क्या सरकारों पर कांग्रेस के लगाये गये आरोपों को जनता गंभीरता से ले रही हैं।

मेन स्ट्रीम मीडिया की छवि खराब हुई
एक सवाल यह उठता है कि अब लोग टीवी चैनल्स और बड़े समाचार पत्रों की कवरेज पर विश्वास नहीं कर रहे है। जनता को यह लगने लगा है कि देश की मेन मीडिया केवल सत्ता के गलियारे और व्यक्ति विशेष की चरण वंदना में जुटी है। सुबह से शाम तक जनता को टीवी स्क्रीन पर पीएम मोदी और अन्य मंत्रियों की चापलूसी चलती रहती है। विपक्ष की गतिविधियों को मेन मीडिया दिखाता ही नहीं है। विपक्षी दल के नेता आज के समय में क्या कर रहे हैं इस बात की जानकारी टी वी समाचार पत्रों से नहीं मिलती है। अतः जनता कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों की रैलियों और जनसभाओं में पहुंच रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब जनता समझ गयी है कि बड़े मीडिय हाउसेस अपनी ड्यूटी न करके सत्ता की चापलूसी में जुट गये है। वहीं मोदी और सरकार भी समझ गयी है कि अब लोग टीवी समाचारों की असलियत समझ गयी हैं। इन चैनलों की टीआरपी दिन ब दिन कम होती जा रही है। जनता का यूट्यूब और सोशल मीडिया का विश्वास बढ़ता जा रहा है। ऐसे पत्रकार जो गोदी मीडिया से अलग राय रखते हैं वो अपना अपना यूट्यूब चला कर सरकार की योजनाओं की पोल खोल रहे हैं। इससे मोदी सरकार जनता की जागरूकता से परेशान दिख रही है। ऐसे पत्रकारों और यूट्यूबर पर सरकार के इशारों पर पुलिस अपने हथकंडे अपना रही है। उन पत्रकारों पर फर्जी केस बना कर उन्हें जेल भेजने की साजिश रच रही है।








