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मध्यप्रदेश में प्रचंड बहुमत के बाद मोदी शाह ने एक ऐसा नाम सुझाया जिससे राजनीति में उबाल आ गया है। केन्द्र की तिकड़ी ने सीएम पद के लिये एक ऐसे व्यक्ति को खोज निकाला है जो कभी चर्चा में ही नहीं आया है। जब ये नाम सीएम पद सार्वजनिक किया गया तो सब के सब भौचक रह गये। ऐलान के बाद वो सभी लोग हैरान रह गये जो खुद सीएम बनने की जुगत में लगे थे। अब सवाल यह है कि शिवराज समेत वो केन्द्रीय मंत्री क्या करेंगे। उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा। मोदी शाह ने क्या जानबूझ कर दिग्गज नेताओं को ठिकाने लगाने की साजिश रची थी। अब यह संदेश दिया गया है कि पार्टी एक व्यक्ति के इशारे पर चलाई जायेगी। कोई भी व्यक्ति चाहे वो कितना बड़ा और प्रभावशाली हो उसकी हैसियत सिर्फ एक कार्यकर्ता से ज्यादा नहीं होगी।

सबकी दावेदारी को लगा पलीता
चुनाव परिणाम ऐलान होने के बाद से ही दिग्गज नेता दिल्ली की दौड़ लगाने में जुट गये। सब अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। इस रेस में सबसे आगे नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नाम चल रहे थे। लेकिन मोदी शाह ने सबको दर किनार करते हुए उज्जैन दक्षिण के विधायक मोहन यादव का नाम सीएम पद के लिये तय किया। नाम ऐलान होते ही नामचीन और दिग्गज नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया। किसी को सपनों में भी गुमान नहीं था कि पार्टी नेतृत्व इस अनजान और गैरचर्चित विधायक मोहन यादव के नाम पर सीएम पोस्ट पर विचार कर सकता है। पार्टी नेतृत्व ने सामान्य कार्यकर्ता को यह भी संदेश दिया कि आने वाले समय में कोई भी किसी भी पद पर बिठाया जा सकता है।
आखिर मोहन यादव ही क्यों सीएम बनाये गये
पूरे देश में यह चर्चा हो रही है कि आखिरकार मोदी शाह ने मोहन यादव के नाम पर सहमति क्यों जतायी। इसके पीछे सिर्फ एक ही मंशा रही कि मोेहन यादव केन्द्रीय नेततृत्व के यस मैन बने रहेंगे। किसी और दिग्गज को सीएम पद पर बैठाते तो इतना गुलामी नहीं करता। इसी वजह से तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, ज्योतिरादित्य, शिवराज और प्रहलाद पटेल को सीएम नहीं बनाया गया है। मोदी शाह ने इससे पहले भी ऐसे प्रयोग गुजरात, उत्तराखंड कर्नाटक और हरियाणा में किया है। गुजरात में तो केन्द्रीय नेतृत्व ने विजय रूपाणी सरकार के पूरे मंत्रिमंडल का इस्तीफा ले दिग्गज नेताओं के मुंह पर ताला जड़ दिया था। उसके बाद से विजय रूपाणी और नितिन पटेल को गुमनामी के अंधेरे में फेंक दिया गया। उत्तराखंड में भी ऐसा ही कुछ किया गया। दिग्गज नेताओं को दरकिनार करते हुए पुष्कर धामी को प्रदेश की कमान सौंपी गयी। उसके बाद चुनाव हारने के बाद भी धामी को सीएम बनाया गया। इसके पीछे सिर्फ वहीं मंशा है कि जो भी सीएम बने वो केन्द्रीय नेतृत्व की जी हुजूरी में जुटा रहे। यही सोच कर मोदी शाह ने मध्यप्रदेश में मोहन यादव को सीएम पद की जिम्मेदारी सौंपी है। इन सब बातों के अलावा मोहन यादव ओबीसी समयज से आते हैं इसका लाभ वो आगामी आम चुनाव में लेने की मंशा रखते हैं। एमपी में एक करोड़ से अधिक यादव वोटर हैं यही खास वजह है कि मोदी शाह ने मोहन यादव को सीएम बनाया है।
कृषि मंत्री तोमर के पर कतरे
मोदी शाह ने कृषि मंत्री तोमर को प्रदेश तक सीमित रखने के लिये उन्हें मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष पद पर तैनात कर दिया है। इससे साफ जाहिर हो गया है कि मोदी शाह ने तोमर से पिंड छुड़ाने को यह पैंपरा चला है। वैसे भी कृषि कानून की वापसी के बाद से मोदी शाह तोमर से किनारा करने लगे थे उनका मानना था कि तोमर कृषि कानून लागू कराने और किसानों को संतुष्ट करने में विफल रहे और मोदी शाह किसी लंगड़े घोड़े को अपने साथ रखना नहीं चाहते हैं।








