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दलबदलने में माहिर हैं ओम प्रकाश राजभर व अन्य नेता
जैसे जैसे लोकसभा चुनाव करीब आते जा रहे हैं वैसे वैसे राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जो रही है। क्षेत्रीय दल अपने स्वार्थ के लिये कहीं गठबंधन को तैयार दिख रहे है। ऐसा एनडीए में ही नहीं यूपीए के साथ जाने वाले दल भी कर रहे है। हाल ही में एनडीए में यूपी की सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने दिल्ली आ कर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपना समर्थन देने की बात की। ऐसे ही बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी महागठबंधन को छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया है। इससे पहले उनके बेटे सुमन मांझी ने बिहार सरकार से मंत्री पद छोड़ भाजपा में जाने का फैसला लिया है। इसके अलावा मुकेश सहनी के बारे में सुना जा रहा है कि वो भी भाजपा में जाने की फिराक में हैं। उपेंद्र कुशवाहा पहले ही जेडीयू छोड़ कर भाजपा के आगे पीछे घूम रहे हैं। वैसे भी बिहार में इन दलों की प्रदेश में विशेष कोई पकड़ नहीं है। बड़े दल के समर्थन से इनकी दो एक सीट निकल जाती है उसी के आधार पर सरकार में हिस्सेदारी मांग लेते हैं। लेकिन जब से नितीश कुमार ने महागठबंधन में वापसी की है तब से इन लोगों को अपनी दाल गलते नही दिख रही है इसलिये बीजेपी में संभावनाएं तलाश रहे हैं। बीजेपी को भी ऐसे छोटे छोटे दलों की जरूरत जो जेडीयू और आरजेडी के वोटों को काट सकें और उनकी सीट मजबूती से जीत सके।

मोदी दुनिया के नंबर एक और योगी नंबर दो झूठे:ओम प्रकाश राजभर उर्फ पल्टीमार
सुभासपा के अध्यक्ष ओपी राजभर यूपी के राजनीति में पल्टीमार के रूप में जाने जाते हैं। पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान उनका गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ था। चुनाव के दौरान राजभर और उनके बेटे अरुण राजभर ने बीजेपी सीएम योगी और पीएम मोदी के खिलाफ खूब जहर उगला। यपी के सीएम योगी के लिये गोरखपुर की टिकट कटवा रहे थे। लेकिन साल भीतर ही ओपी राजभर उनके बेटे की वफादारी मोदी योगी के साथ जुड़ गयी है। दोनों ही बाप बेटे भाजपा और मोदी की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। शायद इसीलिये ये कहावत है कि नेता की तुलना दो मुंहा सांप से की जाती है। चर्चा में है कि राजभर ने अमित शाह से मिलकर तीन सांसद के टिकट और एक बेटे को राज्यसभा की सदस्यता और एक बेटे को यूपी सरकार में मंत्री बनाने की मांग रखी है। अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि उनकी मांगों का भाजपा ने स्वीकार किया है या नहीं। लेकिन ये बात तो तय है कि भाजपा मौके पर गधे को बाप बनाने से नहीं चूकती है। उसे मालूम है कि यूपी में भी भाजपा के लिये आम चुनाव आसान नहीं है। भाजपा को अपनी 40 सीटों पर खतरा मंडराता दिख रहा है। इसलिये वो किसी भी सूरत में क्षेत्रीय दलों को अपने साथ लाने की मुहिम मे जुटी है।
निषाद पार्टी के नेता भी बयानबाजी के लिये जाने जाते हैं
ऐसे ही एक पार्टी है निषाद पार्टी जिनके अध्यक्ष संजय निषाद हैं जो भाजपा के सहयोग से एमएलसी है। एक बेटे का भाजपा के टिकट पर सांसद बनवा लिया है। प्रवीण निषाद उपचुनाव में सपा के टिकट पर गोरखपुर से सांसद बना था। लेकिन 2019 के आम चुनाव में भाजपा के टिकट पर सांसद बन गया था। निषाद पार्टी और अपना दल इस बार भी एनडीए का गठबंधन में हैं। अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल एनडीए की एक और दो में मंत्री परिषद में हैं। लेकिन इस बार अपना दल बीजेपी से अधिक सीटों की मांग कर सकती है। ऐसे में सीटों के तालमेल में भाजपा को काफी परेशानी होने वाली है।
बिहार में निशाने पर चिराग पासवान
बिहार में आम चुनाव के लिये भाजपा ने लोजपा के संस्थापक राम बिलास पासवान के बेटे चिराग पासवान पर डोरे डालती दिख रही है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान ने पीएम मोदी के हनुमान होने का खूब प्रचार किया था। उसने सीएम नितीश कुमार पर जमकर हमला किया था। उनका कहना था कि बीजेपी से बैर नहीं नितीश तेरी खैर नहींं। चिराग के सीधे हमलों से नितीश कुमार बुरी तरह चिढ़ गये थे। इसके साथ ही उनकी पार्टी जेडीयू के काफी दिग्गज नेता चुनाव में हार गये। जेडीयू को लगभग 30 सीटों का नुकसान हुआ। इससे भाजपा को भारी फायदा हुआ। उसके 75 उम्मीदवार विधायक बन गये। नितीश कुमार को भाजपा की साजिश का पता बाद में चला। मोदी चिराग पासवान के खिलाफ कभी सख्त नहीं हुए। दूसरी ओर चिराग पासवान पानी पी पी कर कोस रहे थे। लेकिन चुनाव के बाद ही लोजपा के दो फाड़ हो गये। चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस ने लोजपा पर कब्जा कर लिया। उनके साथ पार्टी के पांच सांसद भी चिराग का साथ छोड़ गये। मोदी ने भी पशुपति नाथ पारस को अपने मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बना दिया। इतना ही नहीं चुनाव आयोग ने भी पशुपति नाथ पारस के गुट को असली लोजपा का सिंबल और झण्डा अलॉट कर दिया। चिराग पासवान से उनका दिल्ली वाला आवास भी ले लिया गया। लेकिन इस बात से भी चिराग पासवान ने सबक नहीं लिया है। वो भाजपा के बिछाये जाल में एक बार फिर फंसने वाले हैं।








