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पिछले एक माह के भीतर जिस तरह से मोदी जी ने भारत रत्न दिये हैं लगता है केजरीवाल की रेवड़ी संस्कृति को विस्तार दिया है। ऐसा लग रहा है कि यह सब राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का अगला कदम है। इसे प्रदान कर सरकार समाज के खास वर्ग को प्रभावित करने का हथकंडा मात्र हो गया है। किसी को इसलिये दिया कि वो सरकार और प्रधानमंत्री से नाराज है उसके घाव पर मरहम लगाने के लिये भारत रत्न दिया। किसी ऐसे प्रदेश के ऐसे नेता को इस लिये दिया गया कि वहां भाजपा की पकड़ को मजबूत किया जा सके। पिछले दस सालों में कुछ ऐसे प्रदेशों में आज भी भाजपा शून्य पर है इसलिये वहां के दिग्गज नेताओं को मरणोपरान्त दिया गया ताकि दक्षिण भारत में भाजपा को खड़ा किया जा सके। किसी को इसलिये दिया गया जिससे वो अपने विराधी गठबंधन को कमजोर कर सकें।
रेवड़ी की तरह कयों बांटे गये भारत रत्न पदक
हाल ही में देश के अंदर भारत रत्न पदक देने में मोदी सरकार ने काफी उदारता बरती है। मोदी जी ने भारत की राष्ट्रपति का एक काम और कम कर दिया है। पीएम ने तय किया है कि किसे भारत रत्न का पदक दिया जायेगा उसे वो तय करेंगे। इसकी जानकारी भी राष्ट्रपति को सुबह पीएम के ट्विटर से पता चल जायेगा। वैसे भी पीएम मोदी के पास अन्य विभागों के मंत्रालयों के काम स्वयं देखने होते हैं। मसलन किस ट्रेन को झण्डी दिखानी है किस सड़क का उद्घाटन करना है। कहां स्टेडियम का लोकार्पण करना है। ये सब करने की जिम्मेदारी भी पीएम की है। अब आप पूछेंगे कि जो छह दर्जन मंत्री किस बात के लिये बनाये गये हैं।

अरे जब पीएम उद्घाटन और झण्डी दिखायेंगे तो वाह वाह करने और ताली बजाने वाले भी तो होने चाहिये। सुषमा स्वराज को लीजिये कहने को तो वो विदेश मंत्री थी। लेकिन उनके नाम विदेशी दौरों पर तो पीएम ही जाते थे। पिछले माह जनवरी में मोदी जी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का नाम तय किया। कर्पूरी ठाकुर बिहार की राजनीति में अहम् भूमिका रही है। सरकार ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर एक तीर से दो निशाने साधे हैं एक तरफ वो बिहार में भाजपा की पकड़ मजबूत करना चाहती है तो दूसरी तरफ वो कर्पूरी ठाकुर के जरिये अति पिछड़े समाज की हमदर्दी बटोरना चाहती है।

एलके आडवाणी को भारत रत्न क्य़ों
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उपप्रधानमंत्री एल के आडवाणी पिछलेे काफी समय से प्रधानमत्री मोदी और अमित शाह से नाराज बताये जा रहेे हैं उनकी नाराजगी जायज भी है। 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में उनकी अनदेखी की गयी। उन्हें कार्यक्रम आने का निमंत्रण तो दिया लेकिन उनसे आने को मना कर दिया। ऐसा ही कुछ पूर्व पार्टी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के साथ भी कहा गया। ये सब जानते हैं की अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण के लिये आडवाणी ने देशव्यापी जनांदोलन किया था। उसके चलते उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। लेकिन जब मदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में उचित सम्मान नहीं दिया गया। इस सबको मैनेज करने के लिये मोदी शाह ने उन्हें भारत रत्न सम्मान से नवाजने में ही अपनी भलाई समझी है। इससे पार्टी के अन्य असंतुष्ट नेताओं को भी एक संदेश दे दिया गया है।

पूर्व पीएम नरसिम्हा राव और एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न
साउथ की राजनीति में मोदी सरकार और भाजपा का जीरो हिस्सेदारी है। इसे बढ़ाने के लिये पीएम और शाह ने तिकड़म लगा कर ऐसे दक्षिण भारत के नेताओं और हस्तियों को भारत रत्न दे कर चाल चली है कि इसी बहाने स्थानीय राजनीति में हिस्सेदारी बढ़ाने कि दिशा में कदम उठाया है। क्रषि विज्ञानी एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न दे कर यह दिखाया गया है कि इससे पहले की सरकारों ने इन लोगों के महत्व को सम्मान नहीं दिया गया लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने उनके महत्व को सम्मान दिया है। इसी तर्ज पर पूर्व पीएम पीवी नरसिम्हा राव को मरणोपरांत भारत रत्न दिया है। इससे साफ जाहिर है कि मोदी सरकार दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पावर बढ़ाने के लिये बेकरार है।
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भी मिला भारत रत्न
भाजपा की ताकत को और भी मजबूत करने के लिहाज से पूर्व प्रधानमंत्री चौ चरण सिंह को भी मोदी सरकार ने भारत रत्न के सम्मान से नवाजा है। इससे पीएम मोदी ने एक तरफ जाट लैंड में अपनी पकड़ को और भी ज्यादा मजबूत किया है साथ ही आरलडी के अध्यक्ष जयंत चौधरी को भी एनडीए में लाने में सफलता पा ली है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि उन्होंने जयंत को अपने पाले में कर के इंडिया गठबंधन को एक जबरदस्त चोट दी है। बात भारत रत्न पदक देने की नहीं कि ये सभी लोग इस सम्मान के लायक हैं या नहीं लेकिन देने के टाइम को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि दो माह बाद देश में आम चुनाव होने वाले हैं ऐसे में चुनावों को प्रभावित करने की दृष्टि से ये सब किया गया है।








