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लाखों की संख्या में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को दिल्ली कूच करने को अपने घरों से निकल पड़े हैं। उनके घरों की महिलाओं ने अपने घरों के मर्दों को तिलक लगा कर विदा किय है। किसानों के इरादों को देख कर केन्द्र सरकार के हाथ पांव फूल गये हैं। मोदी सरकार ने किसानों को दिल्ली में प्रवेश को लेकर पुलिस और मिलिट्री तैनात कर दिया है।

दिल्ली आने वाले सभी रास्तों पर बैरिकैंडिंग और कीलें गाड़ दी हैं। केन्द्र की मोदी सरकार के लिये किसान आंदोलन सिर दर्द बन गया है। मोदी सरकार के लिये यह बहुत बड़ी समस्या ये है कि किसान आंदोलन को लेकर पूरी दुनिया में मोदी सरकार की आलोचना होगी साथ ही दो माह आम चुनाव होने वाले हैं ऐसे में पीएम मोदी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना संकट में आ सकता है। यही वजह है कि मोदी सरकार इस आंदोलन को किसी भी सूूरत में सफल नहीं होने देना चाहती है उसके लिये वो किसी भी स्तर तक गिर सकती है।

भारत जोड़ो न्याय यात्रा भी मोदी सरकार का सिरदर्द
पीएम मोदी और सरकार पहले से ही कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की सफलता से बुरी तरह तिलमिलायी हुई है। दूसरी ओर किसानों के देशव्यापी आंदोलन ने उनकी नींद उड़ा दी है। ये दोनों आंदेालन जन जन तक मोदी सरकार की करतूतों और जनविरोधी नीतियों को पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इससे मोदी और केन्द्र सरकार की राह में बाधा पहुंचगी। बीजेपी और सरकार यह प्रचार करने में जुटी है कि इस बार भाजपा को 370 से अधिक सीटों पर जीत मिलने जा रही है। पूरी कैबिनेट और कार्यकर्ताओं को इस तरह के प्रचार में जुटा दिया गया है। मोदी सरकार और पार्टी तो अभी से यह मान कर बैठी है कि चुनाव तो जीत गये हैं बस चुनाव आयोग की घोषणा होना बाकी है।
दिल्ली में धारा 16 फरवरी धारा 144 लागू
मोदी सरकार ने किसान आंदोलन को विफल करने के लिये दिल्ली की सीमा बंद कर दी है ताकि आंदोलनकारी किसान दिल्ली में प्रवेश न कर पायें। इसके लिये पहले से ही 16 फरवरी तक धारा 144 लागू कर दी है। लेकिन हालात देख कर लगता है कि किसान दिल्ली में प्रवेश करने के लिये किसी भी सूरत पर उतर सकते हैं। ये सब उस वक्त हो रहा है कि जब लोकसभा चुनाव सिर पर आ गये हैं। मालूम किसान आंदोलन में कि देश भर से किसान भाग लेने का निकल चुके हैं। सरकार के आगे आंदोलन रोकने का एकमात्र उपाय किसानों की मांगे मानने के अलावा कोई दूसरी तरकीब नहींं है। इस देशव्यापी आंदोलन को मोदी सरकार ने सारे मीडिया हाउसेस को ब्लैकआउट करने का आदेश दे दिया है। किसान आंदोलन अब केवल यूट्बर और सोशल मीडिया के कवरेज पर ही आश्रित होगा। जैसा कि पिछली बार किसानों के दर्द को स्वतंत्र मीडिया और सोशल मीडिया ने प्रमुखता से जनता तक पहुंचाया था।

मोदी सरकार की वादा खिलाफी से किसान नाराज
दो साल पहले पीएम मोदी ने किसानों से माफी मांगते हुए तीन काले कानून वापस लिये और कहा कि शायद वो किसानों को उनके हित की बात समझाने में सफल नहीं हुए। उस आंदोलन में सात सौ से अधिक किसान शहीद हुए थे। लेकिन न तो पीएम उनकी शहादत पर संवेदना जतायी और न ही मोदी सरकार के किसी किसी मंत्री ने शोक व्यक्त किया। इस बात से किसानों में भारी रोष है। इसके अलावा मोदी सरकार ने जो वादे किये थे वो आज तक पूरे नहीं किये गये। किसान सरकार की फरेबी नीतियों से आक्रोश में हैं। उनका मानना है कि इस सरकार को आम चुनाव के दौरान सबक सिखाया जायेगा। अहंकारी पीएम और मोदी सरकार को किसानों की एकता और संगठन का अहसास कराया जायेगा। लेकिन मोदी सरकार ये सोच रही है कि वो सुरक्षा और सेना के जोर पर किसान आंदोलन को कुचल देगी। यह उनकी भूल है इससे पहले भी किसान आंदोलनों ने पहले भी कई सरकारों को घुटनों पर ला दिया है।
हरियाणा पुलिस की रास्ते रोक गिरफ्तार करने की धमकी
भाजपा शासित राज्यों में पुलिस ने गांव गांव में जा कर ऐलान कर दिया है कि कोई भी आदमी किसान आंदोलन में भाग लेगा या उनकी मदद करेगा उन पर गंभीर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। जेल भेजने के साथ पासपोर्ट और गिरफ्तारी भी की जायेगी। मोदी सरकार की दोहरा चरित्र सामने आ रहा है एक तरफ किसानों को सम्मान निधि प्रदान कर रही है वहीं दूसरी ओर उनके साथ आतंकवादियों की तरह व्चहार कर रही है। उनके रास्तों में बाधा डालने का काम कर रही है। जहां जहां भाजपा शासित सरकारें हैं वहां किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अफसोस की बात है कि एक तरफ पीएम मोदी किसानों को अन्नदाता कहते हैं वहीं दूसरी ओर उनसे किये वादों को पूरा नहीं करते हैं। इन सब बातों से किसानों के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पिछली बार जब किसानों ने तीन काले कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बार्डर पर धरना प्रदर्शन किया था। उसे तोड़ने के लिये केन्द्र सरकार व गोदी मीडिया और सहयोगी पार्टियों ने किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी तक डाला था। इस बार किसानों ने आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बनाया है।
आंदोलन या मोर्चा विरोध निकालना अधिकार है
वर्तमान सरकार ने अंग्रेजों का भी कीर्तिमान तोड़ दिया है। माना कि अंग्रेज तो विदेशी थे उन्होंने जनता का उत्पीड़न किया लेकिन अब देश में अपने लोगों की सरकार है जो देश के किसानों का शोषण करने से नहीं चूक रही है। उन पर पुलिस लाठीचार्ज करने से नहीं चूक रही है। फर्जी मुकदमों में फंसा कर जेल भेज रही है। भारतीय संविधान के तहत जनता को अपनी बात रखने के लिये आंदोलन करने और मोर्चा निकालने का पूर अधिकार है। उसे अपराध नहीं माना जा सकता है। लेकिन सत्ता के मद में मोदी सरकार और भाजपा शासित प्रदेशों में पुलिस और सुरक्षा बल संविधान के खिलाफ किसानों और उनके समर्थकों पर जुल्म ढाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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