
#MLA OP Rajbhar# UP Politics# Modi Govt.# Samajwadi Party# Akhiesh yadav# CM Yogi# PM Modi# BSP# Mayawati# Amit Shah# SBSP#
कोई ओम प्रकाश राजभर ऐसे ही नहीं बन जाता
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का नाम एक तेज तर्रार नेता के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा राजभर अपने बेतुके और बड़बोले स्वभाव के लिये भी जाने जाते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वो किसी भी नेता के लिये कुछ भी अंट शंट बयान देते रहते हैं। पिछले यूपी विधान सभा चुनाव के दौरान ओपी राजभर समाजवादी पार्टीी के साथ गठबंधन में थे। उस दौरान उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी को एक नंबर का झूठा कहा था। योगी के लिये तो कहा था कि योगी को चुनाव बाद गोरखपुर का टिकट मैं कटवा दूंगा। आज वहीं राजभर सत्ता पाने को मोदी के चरणों में लोटने का बेकरार हैं। एनडीए में शामिल होने के पहले राजभर ने तीन लोकसभा सीटों की मांग की है।

साथ यूपी की योगी सरकार में मंत्री पद भी मांगा है। फिलहाल तो अमित शाह ने हामी भर दी है क्यों कि यूपी में भी उन्हें भाजपा की नैया डूबती नजर आ रही है। इसीलिये राजभर और संजय मिश्रा जैसे लोगों की मांग मानने और मनौवल में जुटे हुए है। राजभर के एनडीए में जाने से साफ हो गया है कि न तो भाजपा का कोई उसूल है और न हीं ओपी राजभर का। सत्ता पाने को वो किसी भी स्तर तक जा सकते है। यह पहली बार ऐसा नहीं हुआ है कि ओपी ने भाजपा का दामन था हो। इससे पहले 2017 में भी भाजपा की योगी सरकार में ओम प्रकाश राजभर पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री थे। लेकिन उनकी सीएम योगी से बन नहीं सकी। बाद में सीएम योगी और भाजपा पर गंभीर आरोप लगा कर वो सरकार से अलग हो गये। इसके बाद वो कई सालों तक योगी और भाजपा सरकार के खिलाफ प्रचार करते रहे। 2022 में विधानसभा चुनाव में वो समाजवादी पार्टी के गठबंधन में प्रमुख दल बने।
कौन हैं ओपी राजभर
यूपी के वाराणसी के जहूराबाद जिले में सिंतबर 1962 को राजभर का जन्म हुआ था उनके पिता खदान में काम किया करते थे। घर का खर्च उठाने के लिये वो किसानी करने लगे। जहूराबाद से ही उन्होंने वाराणसी के बलदेव डिग्री कालेज से बीए पास किया बाद में वहीं से एमए राजनीति शास्त्र से पास किया। पढ़ाई को खर्च निकालने के लिये वो टैंपो भी चलाने लगे। 1981 में वो मान्यवर कांशीराम से प्रभावित हुए और उन्होंने अपना राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू किया। मायावती ने उन्हें पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया। लेकिन जब मायावती ने भदोही को जिला संतकबीर नगर बनाया तो उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी। 2002 में उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी बना ली। 2004 में लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार और यूपी में अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारे। लेकिन उनकी पार्टी का एक भी प्रत्याशी को जीत हासिल नहीं हुई।
2017 के चुनाव में राजभर की किस्मत जगी
2017 यूपी के विधानसभा चुनाव में राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था। भाजपा ने उन्हें 8 सीटें दी थी जिसमे उनके चार उम्मीदवार जीत हासिल कर सके। तब भाजपा की सरकार में उन्हें पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में मिला था। लेकिन उनकी सीएम योगी से पटरी नहीे खा रही थी। कुछ समय बाद विवाद इतना बढ़ा कि राजभर योगी और भाजपा सरकार को कोसते हुए सरकार से अलग हो गये। बाद में वो 2202 के चुनाव तक भाजपा सरकार और योगी के खिलाफ प्रचार करते रहे। 2022 के चुनाव में उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ समाजवादी पार्टी का दामन था लिया। इस बार उनकी पार्टी को 12 टिकट मिले जिसमे उनकी पार्टी के छह उम्मीदवारी जीतने में सफल रहे। लेकिन प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की योगी सरकार बन गयी। इससे राजभर काफी अपसेट हो गये। अब उन्होंने भाजपा की जीत के लिये समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराते हुए गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लिया। तब से वो इस फिराक में थे कि किसी तरह उनकी भाजपा में घुसपैठ हो जाये। उनकी कोशिशें रंग लायीं और सरकार में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनकी मुलाकात अमित शाह से करायी और राजभर की मुराद पूरी हो गयी। आज ओपी राजभर एनडीए के साझीदार बन गये है।







