मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने कंपनी के बोर्ड में सऊदी अरामको के चेयरमैन यासिर अल-रुमयान की नियुक्ति का बचाव किया है। कंपनी ने कहा है कि एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में यासिर अल-रुमयान की नियुक्ति के लिए सभी नियामकीय मानदंड पूरे किए गए हैं। शेयरधारकों द्वारा इस नियुक्ति को मंजूरी दिया जाना बाकी है।

क्या है मामला:  रिलायंस के एक शेयरधारक कैलिफोर्निया स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट सिस्टम ने यासिर अल-रुमयान की नियुक्ति का विरोध किया है। दरअसल, सऊदी अरब के पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (पीआईएफ) में अल-रुमयान के पद की वजह से बोर्ड में नियुक्ति का विरोध करने का फैसला किया है। अल-रुमयान पीआएफ के गवर्नर हैं।

पीआईएफ पहले ही रिलायंस रिटेल में 9,555 करोड़ रुपये और आरआईएल के जियो प्लेटफॉर्म्स में 11,367 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। साथ ही, अरामको रिलायंस के तेल एवं रासायन कारोबार में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है।

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रिलायंस के मुताबिक यासिर अल रुमायन की नियुक्ति का सऊदी अरामको के साथ विचाराधीन लेनदेन से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि अल-रुमायन की तीन साल की अवधि के लिए नियुक्ति की पुष्टि करने के लिए मतदान 19 अक्टूबर को पूरा होगा। नियुक्ति तीन साल की अवधि के लिए 19 जुलाई, 2021 से प्रभावी हुई है।



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