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पिछले दस सालों में मोदी शाह के लोकसभा चुनाव 2024 में इंडिया गठबंधन ने ऐसी सीख दी है कि पूरी पार्टी को समझ में आ गया है कि अब जनता को मोदी शाह की असलियत समझ में आ गयी है। महाराष्ट्र राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पीएम मोदी ने पिछले दस साल में अपने आप को भाजपा को मानने पर मजबूर को कर दिया है कि उनके बिना संभव नहीं है।

एक ही चुनाव ने पीएम के ब्रांड को धो दिया है। राहुल गांधी को लेकर फैलाई गयी अफवाहों को लेकर मोदी सभाओं में वाहवाही लूट कर वोटरों को मोह लेते थे। लेकिन अब वही राहुल गांधी उनके सामने बड़ी चुनौती बन कर आ गये हैं। आगामी आधा दर्जन विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। राहुल गांधी के उठाये हुए जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों के जवाब पीएम मोदी के पास नहीं हैं। वो तो सिर्फ लोगों को भटकाने में माहिर हैं। राहुल अखिलेश ने आम चुनावों के प्रचार के दौरान संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दे शुरू से आखिर तक थामे रखा। इसके साथ ही शिक्षा, नौकरी, महिला उत्पीड़न, दलित आदिवासी समस्याओं को भी काफी मजबूती से उठाये। जनता को इंडिया गठबंधन के नेताओं की बात पर भरोसा हुआ। इसका देशव्यापी असर चुनाव में देखा गया।

भाजपा का सूरज अस्त हो रहा है!
विधानसभा चुनाव में यदि पीएम मोदी चुनाव प्रचार करने जायेंगे तो स्थानीय लोगों को केन्द्र सरकार से नाउम्मीदी हुई उसकी नाराजगी का असर वोटर दिखा सकते हैं। फिलहाल देश में दो नेता हैं उनमें एक नरेंद्र मोदी हैं दूसरे नंबर पर राहुल गांधी हैं जिन्होंने पूरे देश में घूम कर भाजपा को हिलाने का काम किया है। इंडिया ब्लाक ने जनता तो भाजपा की 63 सीटों पर हार देखनी मिली है तीसरी बार तो मोदी पीएम बन चुके हैं लेकिन उनके चेहरे पर वो तेज और रौब अब नहीं है जो दो माह पहले था। उसका कारण यह है कि अब तक वो पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के आदि रहे हैं लेकिन पहली बार वो बैसाखी की सरकार चला रहे हैं जो उनके स्वभाव में नहीं है। यही वजह है कि वो पहले वाला शहंशाह नजर नहीं आ रहा है।
चुनाव वाले प्रदेश नहीं चाहते हैं कि वो हारें
आगामी विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली और हरियाणा में होने वाले हैं। लोकसभा में मोदी शाह के प्रचार शैली से अब दूसरे प्रदेशों में स्थानीय भाजपा के नेता अपनी जमीन बचाने के फिराक में हैं। वो नहीं चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव वाली हालत उनके प्रदेशों में हो। क्षेत्रीय नेताओं ने दबी जुबान में यह कहना शुरू कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रख कर तैयारी की जाती है। उस बात को स्थानीय नेता भली भांति समझते हैं। जब मोदी शाह ऐसे चुनावों में जाते हैं तो वहां केन्द्र सरकार की नीतियों का जिक्र इंडिया गइबंधन के नेता करते हैं जिससे क्षेत्रीय भाजपा को नुकसान उठाना पड़ता है।
लोकसभा चुनाव से घबराये भाजपा नेता
महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान समेत अनेक राज्यों में मोदी जी ने जनसभाएं की वहां भाजपा को भारी हार का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र में भाजपा ने 28 जगहों पर मोदी ने रैलियां और जनसभाएं करी थी। केवल 9 सीटों पर ही सफलता मिली। वहां भाजपा को 21 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। ऐसा ही कुछ हाल कर्नाटक में रहा वहां पीएम मोदी ने जमकर सभाएं और रैलियां की वहां भी पार्टी को काफी नुकसान। लगभग एक दर्जन सीटों को भाजपा ने खो दिया 2019 में वहां 28 सीटों में 25 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस बार कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। इस बात का भी काफी असर पड़ा है।
हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र कर्नाटक में मोदी से नुकसान
हरियाणा में लोकसभा चुनाव परिणाम भी भाजपा के हित में नहीं रहा। वहां 10 में 5 सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल कर ली। यानि मोदी जी की सभाओं और रैलियों का असर नहीं पड़ा। बल्कि नुकसान ही हुआ है। ऐसा ही कुछ हाल राजस्थान के लोकसभा चुनाव में देखा गया वहां 2019 के चुनाव में 26 मे 24 सीटों पर सफलता मिली थी। इस बार वहां लगभग एक दर्जन सीटों का नुकसान हुआ है। बीते आम चुनाव में नरेंद्र मोदी ने जिस घटिया स्तर पर जा कर चुनाव प्रचार किया वो देशवासियों को भी काफी अखरा है। जनता में यह चर्चा हुई कि पहली बार किसी पीएम ने इतनी गिरे हुए मुद्दों को जनता के सामने बोला शायद यही वजह रही की वोटरों ने भाजपा उम्मीदवारों को वोट नहीं किया। अब अन्य प्रदेशों के नेताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि पीएम मोदी हमारे यहां चुनाव प्रचार में नहीं आयें। नहीं तो हम चुनाव हार जायेंगे।








