जापान की राजधानी टोक्यो में खेले जा रहे ओलंपिक खेलों में भारत के एथलीट नीरज चोपड़ा इतिहास रच दिया है। नीरज ने एथलेटिक्स में 100 साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारत की तरफ से ओलंपिक खेलों में गोल्ड जीतने वाले नीरज महज दूसरे ही खिलाड़ी हैं। नीरज के गोल्ड मेडल  के साथ ही टोक्यो ओलंपिक में भारत ने सातवां पदक अपने नाम किया, जो कि देश का ओलंपिक में अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन भी है। भारत का इससे पहले बेस्ट प्रदर्शन छह मेडल के साथ लंदन ओलंपिक में रहा था। टोक्यो ओलंपिक में भारत ने एक गोल्ड, दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। 

 

नीरज चोपड़ा से पहले ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल अभिनव बिंद्रा ने निशानेबाजी में साल 2008 बीजिंग ओलंपिक में जीता था। भारत को ओलंपिक 2020 में पहला मेडल वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने दिलाया था। मणिपुर के इस खिलाड़ी ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसके बाद पीवी सिंधु ने बैडमिंटन, लवलीना बोरगोहेन ने बॉक्सिंग में देश को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया था। पहले बार ओलंपिक खेलों में उतरे रेसलर रवि दहिया ने अपने प्रदर्शन से हर किसी का दिल जीतते हुए कुश्ती में सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। वहीं, पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो में 41 साल के सूखे को खत्म करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। नीरज चोपड़ा के मैच से ठीक पहले भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया ने भी देश की झोली में एक कांस्य पदक डाला। 

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 नीरज ने फाइनल मैच में अपना पहला ही थ्रो 87.03 मीटर का फेंका और गोल्ड की उम्मीद जगा दी। इसके बाद दूसरे प्रयास में नीरज ने 87.58 मीटर का थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल पक्का कर लिया। नीरज इससे पहले एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुके हैं और यही वजह है कि पूरा देश की निगाहें उनके ऊपर टिकी हुईं थीं। एथलेटिक्स में भारत को लगभग 100 साल के लंबे इंतजार के बाद नीरज ने गोल्ड मेडल दिलाया है। दिग्गज मिल्खा सिंह 1960 और पीटी ऊषा 1984 में मामूली अंतर से चूक गईं थी। 

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