जीत कर भी हार रही है भाजपा
आठ अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव के रिजल्ट भाजपा के मनमाफिक आ गये। इस बात से भाजपा के खेमे में खुशी का माहौल बन गया। कार्यकर्ता जश्न की तैयारी में जुट गये। लेकिन एक सप्ताह के करीब हो चुका है लेकिन प्रदेश में सरकार अभी तक नहीं बनी है। सीएम पद पर किसकी ताजपोशी होनी है, इस बात पर भी संशय बना हुआ है। वैसे तो हरियाणा विधानसभा चुनाव भाजपा ने सीएम सैनी के नेतृत्व में लड़ा और जीत भी हासिल की। 2019 में जितनी सीटें भाजपा को मिली थी उससे कहीं ज्यादा सीटें इस बार मिली हैं। यहा चर्चा इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि अब की बार हरियाणा में सीएम कौन बनेगा। यहा कई नेताओं ने सीएम पद पर दावे कर दिये हैं। यह भी चर्चा है कि कांग्रेस से भाजपा में आये नेता ने मांग पूरी न होने पर बगावत करने की बात कह दी है। इस बात से इनकार नही किया जा सकता है कि भाजपा में जीत के बाद सब कुछ आल इज वेल नहीं है।
चुनाव आयोग व ईवीएम पर कांग्रेस ने उठाया सवाल
भाजपा ने इस 48 सीटों पर जीत हासिल की हैं। फिलहाल तो कांग्रेस भाजपा की जीत पर उठा रही है। उसका कहना है कि तीन चार जिलो में ईवीएम मे गड़बड़ी हुई हैं। इस बात को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयोग कार्यालय भी पहुचा और वोटिंग काउन्टिग में धांधली की जांच की मांग की है। लेकिन चुनाव आयोग कुछ करेगा इस बात की कोई उम्मीद नहीं है। इससे पहले भी मध्यप्रदेश चुनाव में भी काफी शिकायतें आयोग में की गयी थीं। अभी तक उन पर कोई ऐक्शन नहीं लिया गया है। वैसे भी विरोधी पार्टियां चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुकी हैं। जितने भी चुनाव हो रहे हैं उसमे आयोग सत्ता धारी दल के हिसाब से ही चुनाव कार्यक्रम तय करता दिख रहा है। पहले हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव एक साथ होते थे। लेकिन इस बार हरियाणा का चुनाव जम्मू कश्मीर के साथ कराये गये। जम्मू कश्मीर में भाजपा की चालें सफल नहीं हुई औ वहां इंडिया गठबंधन की सरकार बनने वाली है।
हरियाणा में भाजपा की सरकार क्यों नहीं बन रही
हरियाणा में चुनाव परिणाम आने के 6 दिन बाद भी केन्द्रीय नेेतृत्व प्रदेश में सरकार बनाने में क्यों देर कर रहा है जबकि पहले से ही भाजपा ने यह ऐलान कर दिया कि चुनाव के नेता सीएम सैनी हैं। यह भी तय माना जा रहा था कि भाजपा सरकार का नेतृत्व नायब सिंह सैनी को मिलेगा। सैनी भी अधिकांश समय दिल्ली में ही बिता रहे है। कभी सवाल पीएम मोदी से मिल रहे हैं तो कभी अमित शाह से। इस बीच वो जेपी नड्डा से भी मिल चुके हैं। भाजपा को तीन निर्दलीय सदस्यों सावित्री जिंदल, राजेश जून और राजेंद्र कादियान का समर्थन भी मिल गया है। ये सुनने में आ रहा है कि सरकार जल्दी बनाने के मूड में नहीं दिख रही है। दिल्ली में कुछ अलग ही खिचड़ी बन रही है। सीएम पद पर भाजपा अभी खुल कर नहीं बात कर रही है। इधर सीएम पद पर बैठने को सैनी काफी बेकरार है। ये भी मंत्रणा हो रही है कि किस किस को मंत्रिमंडल मेंं शामिल किया जाये।
सैनी के साथ ये नेता भी सीएम पद की रेस में
चुनाव तक तो भाजपा में सब कुछ ठीक ठाक था जैसे ही परिणाम सामने आये वैसे ही भाजपा में सीएम पद के लिये दावों की झड़ी लग गयी है। सीएम सैनी तो पहले से ही सबसे आगे थे। लेकिन उनके अलावा पूर्व गृह मंत्री अनिल विज ने चुनाव के बाद ही यह कह कर चौंका दिया था कि वो प्रदेश में सबसे वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक हैं वो भी सीएम पद के लिये दावा कर सकते हैं। इस​का मतलब साफ है कि सीएम पद पर जो राह मची है उसके चलते प्रदेश में भाजपा के दो हिस्से न हो जायें। एक तरफ सैनी हैं तो दूसरी ओर सीनियर नेता अनिल विज हैं पार्टी इन्हें किस तरह साधती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से भाजपा में आये केन्द्रीय राज्य मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह ने भी सीएम पद पर दावेदारी ठोक दी है। राव साहब पहले केन्द्र में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान मोदी सरकार में उन्हें राज्य मंत्री बना कर उनका डिमोशन कर दिया है। कुछ समाचार चैनलेां में यह चर्चा भी चल रही है कि राव इंन्द्रजीत ने यह कह दिया है कि अगर भाजपा उन्हें हरियाणा में सीएम नही बनाती है पार्टी से बगावत कर लेगे। सूत्र बता रहे हैं कि इस मामले को लेकर उनकी कांग्रेस से बात चल रही है।

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