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ईवीएम की निष्पक्षता पर सवालिया निशान
भारत में जब भी चुनाव होते हैं तो चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठते रहते हैं। विपक्ष हमेशा यह आरोप लगाता है कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे दल के दबाव में यह कर चुनावी कार्यक्रम तैयार करता है। ऐसा कहा जाता है आचार संहिता लागू करने के मामले में चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहता है। चुनाव आयोग पर पिछले दस सालों से गभीर आरोपो से घिरा रहा है।

हमेशा से ईवीएम से वोटिंग को लेकर विरोध जताता रहा है। लेकिन चुनाव आयोग इस बात को नकारता रहा है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है। जबकि विपक्षी दल यह कह रहे हैं कि जिन देशों में ईवीएम से चुनाव कराये जाते थे वहां अब बैलट पेपर से चुनाव किये जा रहे हैं। भारत में केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग ईवीएम से चुनाव कराने पर क्यों अड़े हैं। भारत में ईवीएम के द्वारा चुनाव कराने के विरोध कई संस्थाएं और समाजसेवी संस्थाएं आंदोलन कर रहे हैं। इनमें सुप्रीमकोर्ट के एडवोकेट भी अभियान छेड़े हुए हैं। कांग्रेस के 20 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग में काउन्टिग में धांधली के लिये शिकायत दर्ज करायी है। कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में ईवीएम धांधली की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है।
ईवीएम और चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर
राजनीतिक दल अक्सर आरोप लगाते हैं कि ईवीएम को हैक कर वोटों में हेराफेरी की जा रही है। अक्सर समाचारों मे दिखाया जाता है कि वोटिंग के समय में मशीनें खराब हो जाती हैं। मशीनों के बदलने की आड़ में वोटों की धांधली करने का आरोप भी है। विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि ईवीएम में प्रोग्राम में हेरफेर कर वोटों की चोरी की जाती है। कुछ संस्थाओं ने यह आरोप लगाया है कि 2023 के मध्यप्रदेश विधान सभा चुनावों में भारी तादाद में ईवीएम गायब हुई थी। उस बारे में चुनाव आयोग को लिखित शिकायत की गयी लेकिन आज तक चुनाव आयोग ने उन शिकायतें पर कोई जवाब नहीं दिया है। राजनीतिक दल यह आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों की शिकायतों को नही सुनता है। लोकसभा चुनाव 2024 मेें परिणामों को लेकर भी विपक्षी दलों ने विलंब को लेकर भी चुनाव आयोग के कार्य प्रणाली पर सवाल उठाये थे। सात चरणों में चुनाव कराने को लेकर भी चुनाव आयोग को निशाने पर रखा गया थे। अरोप लगा था कि मोदी सरकार के इशारों पर इतना लंबा चुनाव कराया गया।

लोकसभा चुनाव के दौरान काफी संख्या सरकारी कर्मचारियों की अकाल मौत हो गयी थी। अचार संहिता के मामले मे भी चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के नेताओं पर उदार रहने का आरोप है। मोदी शाह के भाषणों में दिये गये विवादित बयानों पर चुनाव आयोग अक्सर चुप दिखाई देता है। कार्रवाई तो केवल इंडिया ब्लाक के नेताओं पर ही होता है ऐसा आरोप विपक्षी दल के नेता लगाते हैं।
चुनाव आयोग और ईवीएम के बचाव में बीजेपी क्यों
एक तरफ इंडिया गठबंधन ईवीएम को लेकर आंदोलन करने के मूड में दिख रही है तो भाजपा और सरकार ईवीएम से वोटिंग को लेकर विपक्ष को कोसना जारी रखे है। यह आरोप है कि ईवीएम के जरिये भाजपा वोटों में धांधली कर विपक्ष को साजिशन हरवा दिया जाता है।

विधानसभा चुनाव परिणाम पर संदेह
ताजा हालात तो हरियाणा विधान सभा चुनाव परिणामों को लेकर चर्चा है। इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिये सुखद नहीं आये। भाजपा की तीसरी बार सरकार बनने जा रही है। सोशल मीडिया और सर्वों में यह माना जा रहा था कि दस साल की सरकार से नाराजगी की वजह से कांग्रेस की शानदार जीत होने के आसार दिख रहे थे। लेकिन रिजल्ट ऐसे आये कि कांग्रेस के तोते उड़ गये। भाजपा को इस बार 2019 से भी अधिक सीटों पर सफलता मिली है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज करायी है कि बीस सीटों पर ईवीएम से वोट गणना में भारी धांधली की गयी है। ये वो सीटें हैं जहां कांग्रेस उममीदवार बहुत कम अंतरों से हारे हैं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने पुख्ता प्रमाणों के साथ चुनाय आयोग को शिकायत दर्ज करायी है।








