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देश के पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव के लिये प्रचार जारी है। सभी राजनीतिक दल प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनाव आयोग ने आचार संहिता के तहत नियम कायदे तय किये हैं। लेकिन सत्ताधारी दल बीजेपी के लिये ये नियम कायदे कोई मायने नहीं रख रहे हैं। उल्लंघन करने में पीएम से लेकर सीएम तक जोरदार तरीके से भूमिका निभा रहे हैं। जम कर धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनाव को अपने में करने के लिये जमकर धार्मिक आस्था का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि चुनाव आयोग की संहिता में साफ कहा गया कि चुनाव प्रचार में धर्म व आस्था संबंधी प्रचार नहीं किया जायेगा। लेकिन पीएम से लेकर सीएम तक धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा है।
लगभग पिछले एक दशक से देखा जा रहा है कि चुनाव आयोग की गरिमा गिरती जा रही है। उसके गाइड लाइंस की खुलेआम धज्जियां उड़ायी जाती हैं। वो मूक दर्शक की तरह चुपचाप बैठा रहता है। दूसरी ओर पंजाब में कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के नेताओं पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन करने पर मामला दर्ज कराया है। इससे साफ जाहिर हो रहा है। चुनाव आयोग केवल सत्ताधारी दल की उंगलियों पर नाच रहा है। वो वही कर रहा है जो पीएमओ और भाजपा निर्देश दे रहे हैं।
चुनाव के दिन पीएम मोदी समाचार एजेंसी को इंटरव्यू दे कर भाजपा का प्रचार करते हैं। यह इंटरव्यू आचार संहिता के खिलाफ था। इसे देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से चलाया। ठीक इसी तरह 10 फरबरी को यूपी के सीएम योगी ने एक टीवी चैनल से बात की इसे भी गोदी मीडिया ने प्रमुखता से चलाया। यह इंटरव्यू प्रचार की तय सीमा के बाद किया गया जो आचार संहिता के नियमों का खलेआम उल्लंघन था। लेकिन चुनाव आयोग ने इस उल्लंघन पर किसी पर कोई ऐक्शन नहीं लिया। यहा तक कि किसी को नोटिस तक नहीं दिया। 20 फरवरी को कानपुर में हुए मतदान के दौरान मेयर प्रमिला पाण्डेय ने बीजेपी को मतदान करने के बाद फोटो खींच कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। इस बात को लेकर अन्य दलों ने काफी हल्ला किया लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।

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