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गुजरात में चुनाव भी हो गया और भाजपा की एक बार फिर से सरकार बन गयी है। भूपेंद्र पटेल की दूसरी बार ताजपोशी भी हो गयी। लेकिन गुजरातवासियों को उनकी समस्याओं से निजात मिलेगी। इस बात की कोई गारंटी नहीं है। क्या मोरबी के आरोपी को सजा मिलेगी। पुलिस दोषियों के खिलाफ कोई ऐक्शन लेगी। गुजरात सरकार ओरेवा कंपनी के मालिक के खिलाफ कदम उठायेगी। यह सवाल विपक्षियों के दलों के दिमाग में कौध रहे हैं। वैसे गुजरात की बीजेपी सरकार को विपक्ष की मांग और सवाल से कोई लेना देना नहीं। क्यों कि मोरबी पुल कांड में 135 लोगों की दर्दनाक मौत को स्थानीय लोगों इतनी जल्दी भुला दिया। वहां भी भाजपा का प्रत्याशी जीत गया। वहीं दूसरी ओर एग्जिट पोल भी काफी हद तक सही साबित हुए। इस बात से साफ जाहिर हुआ कि प्रदेश सरकार मोरबी कांड के मुख्य आरोपी को ऐसे ही आजाद घूमने देगी। जब उसने मोरबी जिला प्रशासन के किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं तो अब तो वो दोबारा सरकार बना चुकी है। सब मामला ठंडे बस्ते में चला जायेगा। गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी भी गुजरात सरकार का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगी।
भाजपा की ऐतिहासिक जीत
भाजपा ने ऐहिासिक जीत हासिल करते हुए 156 सीटों पर एमएलए बनाये हैं। इससे साफ जाहिर हो गया कि गुजरात के लोगों को सिर्फ मंदिर मजिद, हिन्दू मुस्लिम और सांप्रदायिकता ही अच्छी लगती है। उन्हें फर्जी राष्ट्रवाद और आडंबर में ही जीना है। उनके लिये न तो बेहतर शिक्षा चाहिये और न ही उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को हाशिये पर ला दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ जिसे पिछले विधानसभा चुनाव में 77 सीटों पर जीत हासिल हुई थी लेकिन इस बार उनको साठ सीटों का नुकसान हुआ है। कांग्रेस पर एक कहावत सटीक बैठ रही है कि धोबी से जीत न पायी तो गधे के कान उमेठना।बीजेपी से जीत नहीं पायी तो सारी खीझ आम आदमी पार्टी पर गुस्सा निकाल रही है।
कांग्रेस और आदमी पार्टी आपस में भिड़ीं
वहीं आम आदमी पार्टी जो गुजरात मे सरकार बनाने की मंशा पाल रखे थी। उसे केवल पांच सीटें ही मिल सकी है। दिलचस्प यह है कि दोनों ही एक दूसरे को कोस रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने बीजेपी की मदद करी है जिससे कांग्रेस के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन कांग्रेस को अपनी गल्तियों पर भी गौर करना चाहिये। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि कांग्रेस ने पूरी ताकत से गुजरात चुनाव लड़ा ही नहीं। उनके स्टार प्रचारक गुजरात में प्रचार करने ही नहीं आये। सोनिया प्रियंका और दिग्गज नेता प्रचार से गायब रहे। यह बात बीजेपी के फायदे में रही और उसने कांग्रेस औश्र आम आदमी पार्टी को आसानी से निपटा दिया। नतीजा यह रहा कि आज गुजरात में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत हुई।








