#IndianPolitics#ModiGovt.#AmitShah#NitinGadkari#CMYogi#CMShivraj#GeneralElection2024#PMCandidate#
मोदी शाह ने जेपी नड्डा के साथ मिलकर नयी संसदीय कमेटी का गठन किया जिसमें दिग्गज नेताओं को नाम नदारद थे। उनकी जगह नये चेहरों को शामिल कर बीजेपी क्या संदेश देना चाह रही है ये तो वही जाने लेकिन जनता के बीच यह संदेश गया है कि बीजेपी अपने ही दिग्गज नेताओं के पर काटने में लगी है। जिन नेताओं को कमेटी जगह नहीं मिली है उनमें केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, यूपी के तेज तर्रार सीएम योगी आदित्यनाथ और मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं किया गया है। शायद यह डर है कि आगामी आम चुनाव में पीएम पद के लिये ये नेता अपनी उम्मीदवारी न पेश कर दें।
ये वो नाम हैं जिनका इतिहास भाजपा के लिये काफी उल्लेखनीय है। नितिन गडकरी पार्टी अध्यक्ष रह चुके हैं साथ ही वो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी प्रभावी मंे मंत्री रहे हैं। इसके अलावा मोदी सरकार 1 और पार्ट 2 में भी कई विभागों के मंत्री हैं। ऐसे में गडकरी का ओहदा पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं होती है। उनका कमेटी में नाम न होना हैरान करने वाला विषय है। लोग ये भी चर्चा कर रहे हैं कि मोदी और शाह को नितिन गडकरी की लोकप्रियता से खतरे की बू आने लगी है। इसके अलावा उन पर न तो मोदी का असर पड़ना है और न ही शाह की तिकड़मों का। वो अकसर पार्टी लाइन से हट कर बयान देने से भी नहीं चूकते हैं। यही वजह मानी जा सकती है कि उन्हें कमजोर करने के लिये कमेटी में उन्हें शामिल नहीं किया गया है।
ऐसा ही कुछ यूपी के सीएम योगी के बारे में कहा जा सकता है। योगी अपनी धुन के पक्के माने जाते हैं। पहली बार जब योगी को यूपी का सीएम बनाया गया था तब किसी को भनक तक नहीं थी कि यूपी का सीएम योगी बनेंगे। अचानक योगी के नाम पर आरएसएस ने हामी भर दी और योगी पहली बार यूपी के सीएम बन गये। योगी के वर्चस्व और हनक का प्रभाव था कि यूपी में लगातार दूसरी बार बीजेपी की सरकार बंपर बहुमत से बनी। यह इतिहास है कि आजतक यूपी में सत्तारूढ़ पार्टी दोबारा नहीं बनी है। ऐसे में योगी का कद भाजपा में काफी बढ़ गया। योगी ने अपने विरोधी दलों को ऐसा सबक सिखाया कि उनके वजूद पर ही संकट आ गया। बसपा और कांग्रेस तो मरणासन्न अवस्था में पहुंच गयीं। केवल समाजवादी पार्टी ही है जिसने भाजपा का मुकाबला किया और 125 सीट जीतने में सफल रही। ऐसा सिर्फ योगी का चमत्कार ही माना जा सकता है।
इस चमत्कार से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी चिंतित हुआ उन्हें लगने लगा कि योगी का कद इसी तरह बढ़ा तो कल को मोदी और शाह के लिये खतरा बन सकता है। यही सोच कर संसदीय कमेटी में गडकरी और योगी को शामिल नहीं किया गया है। कमेटी में जो दो नये नाम जुड़े हैं उनमें देवेंद्र फडणवीस और सुधा यादव का है। देवेंद्र फडणवीस का समझ में आता है कि उन्होंने ही महाराष्ट्र में भाजपा को सत्ता दिलाने में अहम् भूमिका निभाई थी उन्हें तो पुरस्कार मिलना था। लेकिन सुधा यादव को किन कारणों से कमेटी में शामिल किया गया है। वो भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बेहतर समझ सकता है।








