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भारत में राम नवमी के अवसर पर कई दशकों से राम यात्रा निकाली जाती रही है। पूरे देश में सभी लोग से काफी धूमधाम और श्रद्धा से मनाते हैं। इस पर्व न केवल हिन्दू बल्कि मुसलमान भी पूरी शिद्दत से भाग लेते है। लेकिन इधर सात आठ साल से राम यात्रा के दौरान हिंसक वारदातें बढ़ रही है। खासतौर से उन प्रदेशों में जहां बीजेपी सरकारें हैं वहां कुछ ज्यादा ही राम के नाम उपद्रव किये जा रहे हैं। पहले श्रीराम को प्रेम, आदर व सत्कार के रूप में प्रयोग करते थे आज धर्माध भीड़ के लिये एक हथियार बन चुका है। जहां कहीं भी सौ पचास लोगों की भीड़ आतंक और उपद्रव मचाती है वहां मौजूद लोग जयश्री राम का नारा लगाते हैं। भीड़ तंत्र अब जयश्री राम को अपने बचाव में इस्तेमाल कर रहे हैं। केन्द्र की मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्य भी इन सब वारदातों पर शांत हैं और इसे बढ़ावा देते नजर आ रही है। क्यों इन सब वारदातों से हिन्दू वोट एक हो जायेगा। उन्हीं के बल पर वो शासन करने की योजना साकार करने का सपना देख रहे हैं। यहां तके कि प्रशासन और पुलिस नामर्दों की तरह जमीन की ओर चुपचाप खड़ा रहता है। राम नवमी पर देश के पांच छह राज्यों में जमकर हिंसक वारदातें और झड़पें हुई।
मध्यप्रदेश के खरगौन जिले में यात्रा के दौरान जमकर पथराव हुआ। दोनों ओर से लोग घायल हुए लेकिन पुलिस प्रशासन ने केवल समुदाय विशेष पर ही कार्रवाई की। बिना जांच पड़ताल के ही प्रशासन ने 52 घरों को अवैध बता कर ढहा दियें। 94 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जेल भेजे गये सभी लोग सुस्लिम समुदाय के है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने यह भी कहा कि किसी भी आतंकवादी घटना को पनपने से पहले फन कुचल दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज होगा। उन्होंने शांति भंग करने का प्रयास किया है। हिंसा के दौरान बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के वीडियो को उन्होंने क्लीन चिट देते हुए कहा कि यह सब विपक्ष की साजिश है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में राम नवमी यात्रा के दोरान कुछ अतिवादी युवाओं ने स्थानीय मस्जिद को निशाना बनाया। मसजिद के सामने न केवल जयश्री राम के भड़काऊ नारे लगाये बल्कि उसकी मीनार पर चढ़ गये। इतना ही नहीं कुछ भगवा आतंकी मीनार पर चढ़े और वहां भगवा झण्डा फहरा दिया। इसके बाद भी मन नहीं भरा तो मुस्लिम विरोधी नारे लगाने लगे। इससे क्या साबित हो रहा है कि सरकारें ऐसी वारदोतों पर रोक लगाने के बजाये बढ़ावा देने का काम कर रही हैं। बिहार सरकार और पुलिस ने क्या करर्रवाई की इसकी कोई जानकारी नहीं है।
नोयडा में एक पत्रकार भीड़ तंत्र को सही ठहराने वाले आज उसी के शिकार बन गए। टीवी एंकर के घर भीड़ ने घुसकर सिर्फ इसलिए हमला बोला क्योंकि उन्होने पुलिस से डीजे बजाने वाले के खिलाफ शिकायत की थी इससे भड़के भक्तो ने एंकर को लात घूंसो से पीटा। इतना ही नहीं उसकी बीवी को नंगा कर सड़को पे घूमने की भी धमकी दी। दिलचस्प बात यह है कि ये सब यूपी पुलिस के सामने हुआ। पुलिस उन गुंडों के आगे हाथ बांधे दिखी। हाल ही में एम पी में भी पत्रकारों को थानेदार नंगा कर पीटा और उनका वीडियो बनाकर नेट पर डाल दिया था। इन सब मामलों को सत्तधारी दल कोई तवज्जो नहीं दे रहे है गलती नेताओ या पुलिस की नही बल्कि गोदी मीडिया की है जिसने अपना जमीर स्वार्थ के लिए बेच दिया है। इन हादसों की पीड़ा को वहीं समझता जिसने इसके दंश को झेला होता है।








