CM Shivraj made glorious history in assembly elections and teach Modi Shah
CM Shivraj made glorious history in assembly elections and teach Modi Shah

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पिछलेे कई माह से देश में पांच राज्यों की गूंज सुनायी दे रही थी। ​रविवार 3 दिसंबर को उनका परिणाम भी आ गया। कुछ के चेहरों पर रौनक आ गयी तो कुछ के चेहरे मुरझा गये। कुछ लोग जनता के हीरे बन गये ​तो कुछ लोग अपनों के बीच ही विलेन बन गये। मध्यप्रदेश में तो चुनाव परिणाम इतने अप्रत्याशित रहे कि भाजपा को भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उसे इतनी प्रचंड जीत हासिल हुई है। जहां कल तक सीएम शिवराज चौहान को लोग गुजरा जमाना कह रहे थे आज वो लोग उनकी शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। मीडिया ने मामा को गुजरा जमाना बना दिया था। इतना ही नहीं प्रदेश बीजेपी ने भी मुख्यमंत्री शिवराज को प्रचार पोस्टरों से गायब कर दिया था। प्रचार में तो केवल पीएम मोदी और शाह का ही वर्चस्व दिख रहा था। हारने की हालत देख शिवराज के हाथ में कमान दे दी गयी और उसका परिणाम यह है कि प्रदेश में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली और कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। महिला वोटरों ने अपने भाई शिवराज की साख को बचा कर हार को जीत में बदल दिया।
कांग्रेस की हार के कारण
कांग्रेस चुनाव क्यों हारी यह विचार का विषय है। यह कहा जाये कि राहुल प्रियंका और खरगे की मेहनत में कमी थी तो यह बेमानी होगा। सभी ने प्रचार प्रसार में काफी दम लगाया लेकिन वो प्रदेश की जनता को विश्वास में नहीं ले सके। प्रदेश की जनता को भी धर्म मंदिर और हिन्दू मुस्लिम की राजनीति ही पसंद आयी। उन्हें रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य नहीं चाहिये उन्हें तो धार्मिक उन्माद और घंटा घड़ियाल की घुट्टी ही पसंद है। कुछ लोग तो यह कह रहे हैं कि कांग्रेस की हार के लिये पूर्व सीएम कमलनाथ भी जिम्मेदार हैं उन्होंने राहुल व प्रियंक गांधी समेत खरगे के साथ विश्वासघात किया है। उनका धीरेंद्र शास्त्री के कदमों में नतमस्तक देख पार्टी का मनोबल कम हुआ और कार्यकर्ता हतोत्साहित हुआ।
मीडिया ने भी शिवराज को नकारा
कुछ लोगों ने तो यह भी कह दिया कि शिवराज के आगे मोदी शाह और नड्डा भी बौने हो गये हैं। यह कहा जाये कि शिवराज ने मोदी शाह और नड्डा की तिकड़ी को हरा दिया। वर्ना तिकड़ी शिवराज को चुनाव के पहले ही रिटायर हर्ट कर दिया था। लेकिन मामा ने अपने शांत स्वभाव के चलते चुनाव के आखिरी दौर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। वैसे मोदी और शाह ने भी प्रचार में साथ दिया लेकिन शिवराज को महत्व नहीं दिया। मोदी शाह ने अपने प्रचार भाषणों में शिवराज और उनकी सरकारी योजनाओं का नाम लेना तक नही लिया। इससे साफ हो गया कि मोदी शाह चाहते थे कि प्रदेश में भाजपा की सरकार तो आये लेकिन शिवराज की वापसी न हो। इसी क्रम में मोदी शाह ने तीन केंन्दीय मंत्रियों समेत सात सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतार कर शिवराज के सीएम पद पर रोड़े अटकाने का काम किया।

What is futre of Cabinate ministers & BJp Mp who fought assembly elections
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अब इन केन्द्रीय मंत्रियों का क्या होगा
जब चुनाव परिणाम ऐतिहासिक आया है तो सीएम पद की रेस में सबसे आगे तो शिवराज ही दिख रहे हैं। इससे यह तो साफ है कि मोदी शाह भी शिवराज को सीएम रेस से बाहर नहीं कर सकते है। लेकिन सवाल तो यह है कि उन केन्द्रीय मंत्रियों और सांसदों को अब शिवराज के अधीन काम करना होगा। उनके लिये दिल्ली के दरवाजे बंद हो गये है। उनकी शान ओ शौकत पर बट्टा लगने वाला है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को होगी तो काफी समय से केन्द्र की धुरी बने हुए थे। ऐसी ही कुछ हालत प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते की भी है। केन्द्रीय मंत्री रहते हुए इनकी शान और रुतबा बरकरार था। लेकिन विधायक बनने के बाद इन लोगों को जनता के बीच वो सम्मान और रुतबा कायम नहीं रहेगा। अब ताजा हालात तो यह हैं कि मोदी शाह और नड्डा के न चाहने पर सीएम तो शिवराज ही बनने जा रहे हैं।

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