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कांग्रेस के नेता क्यों पाला बदल रहे हैं। खास तौर से युवा। 2020 से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह और अब गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल के कांग्रेस से मोहभ्ंग होने की खबर आ रही है। उन्होंने ट्विटर से कांग्रेस का तिरंगा भी हटा दिया है। सूत्र बता रहे हैं कि वो कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी व बीजेपी के संपर्क में हैं। अहमद पटेल के निधन के बाद गुजरात में कांग्रेस और भी ज्यादा कमजोर हो गयी है। उनके बेटे ने भी कांग्रेस से नाता रखने में रुचि नहीे दिखाई है।
कांग्रेस से अधिक प्रभाव तो आम आदमी पार्टी का दिखाई देने की बात लोग करते हैं। सबसे बड़ी बात है कि पिछले चार साल से कांग्रेस का कोई स्थाई अध्यक्ष नहीं है। इससे कार्यकर्ता काफी मायूस है। इसके साथ कांग्रेस लगातार काफी कमजोर प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस ने 2017 में राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ मे और पंजाब मे सरकारें बनायी लेकिन कर्नाटक और मध्यप्रदेश में बीजेपी ने कांग्रेस के विधायकों को खरीद कर सरकार गिरा दी और वहां भाजपा सत्ता में आ गयी। लेकिन पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह से हार का सामना करना पड़ा। ठीक चुनाव से कुछ माह पहले कांग्रेस आला कमान उस समय के सीएम अमरिंदर सिंह से इस्तीफा मांग लेते है और उनके धुर विरोधी नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस की कमान सौंप दी। इससे प्रदेश में कांग्रेस की खींचतान जग जाहिर हो गयी। कांग्रेस के एक गलत फैसले ने पंजाब में उनकी जमीन खिसकने पर मजबूर कर दिया।
बड़ी बात यह हैं कि कांग्रेस के नेता किसी तरह चुनाव जीत तो लेते हैं लेकिन लालची होने की वजह से भाजपा उन्हें खरीद लेती है। यह बात पार्टी आज तक नहीं समझ पायी है कि अपने नेताओं को चुनाव जीतने के बाद भाजपा की खरीद फरोख्त से कैंसे बचाए। ऐसे कई मौके आये जब भाजपा ने कांग्रेस के विधायकों को बगावत करने पर मजबूर किया और कांग्रेसी सरकारों को गिरवा कर वहां अपनी सत्ता बना है। नमूने के तौर पर कर्नाटक और मध्यप्रदेश सामने हैं। मध्यप्रदेश में सरकार गिरवाने में पूर्व कांग्रेस सांसद और मंत्री वर्तमान में बीजेपी सरकार में सिविल एंवियेशन मंत्री ज्योतिरादित्य ने अहम् भूमिका निभाई और उनके समर्थन में कांग्रेस के लगभग दो दर्ज मंत्री विधायकों ने बगावत कर भाजपा को समर्थ दे दिया। दिलचस्प यह है कि उस समय के सीएम कमलनाथ को इतनी बड़ी बात का पता ही चल पाया। इससे कांग्रेस की सोेच और राजननीतिक चतुराई पर सवाल उठता है।

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